भाषा जो बनाए सेतु: विश्व हिंदी दिवस पर सोनी सब कलाकारों ने बताया हिंदी का वैश्विक महत्व

विश्व हिंदी दिवस पर सोनी सब के कलाकारों ने हिंदी की वैश्विक गूंज और इससे जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला.

भाषा जो बनाए सेतु: विश्व हिंदी दिवस पर सोनी सब कलाकारों ने बताया हिंदी का वैश्विक महत्व

हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. कल इस दिवस की धूम हर तरफ देखने को मिलेगी. इस मौके पर सोनी सब के कलाकारों ने हिंदी भाषा के महत्व और उसकी वैश्विक पहुंच पर अपने विचार व्यक्त किए. कलाकारों ने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और संस्कृति को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है. आज हिंदी दुनिया के कई देशों में बोली और समझी जा रही है, जो इसे एक वैश्विक पहचान दिलाती है. इस अवसर पर कलाकारों ने नई पीढ़ी से हिंदी को अपनाने, सम्मान देने और आगे बढ़ाने का संदेश भी दिया.

अभिव्यक्ति की एक जीवंत परंपरा है-

एक ऐसी दुनिया में जहाँ कहानियाँ, भावनाएँ और संबंध महाद्वीपों तक फैले हुए हैं, भाषा हमारी सबसे गहरी साझा जड़ों में से एक बनी हुई है. विश्वभर में लाखों लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिंदी, केवल संचार का माध्यम नहीं है; यह संस्कृति, इतिहास और अभिव्यक्ति की एक जीवंत परंपरा है जो लोगों को क्षेत्रों और पीढ़ियों से जोड़ती है. विश्व हिंदी दिवस पर, जो हिंदी के वैश्विक महत्व को अपनाने और सीमाओं से परे इसकी समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, सोनी सबके  प्रिय कलाकार इस बात पर विचार करते हैं कि यह कालातीत भाषा उनके लिए व्यक्तिगत और व्यावसायिक रूप से क्या मायने रखती है.

दिलों और संस्कृतियों को एकजुट करती है-

टीवी कलाकार अविनेश रेखी कहते हैं, “जब भी मैं सेट पर कदम रखता हूँ, हिंदी स्वाभाविक रूप से मेरा भावनात्मक सहारा बन जाती है  मैं शब्दों के बीच के विरामों, वाक्य की कोमलता या दृढ़ता पर ध्यान देता हूँ, और यह समझने की कोशिश करता हूँ कि कैसे एक भाव पूरे अर्थ को बदल सकता है. हिंदी के माध्यम से ही मैं सचमुच किरदार को जीवंत महसूस करता हूँ. विश्व हिंदी दिवस पर, मुझे याद आता है कि यह भाषा भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर, चुपचाप दुनिया भर के दिलों और संस्कृतियों को एकजुट करती है, और विभिन्न स्थानों के लोगों को एक ही भक्ति, आनंद और भावना का अनुभव करने का अवसर देती है.”

हिंदी सिर्फ बोलने की भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी भावना है-

वहीं छोटे पर्दे की अभिनेत्री श्रेनु पारिख ने कहा, “मुझे आज भी याद है कि बचपन में मैं हिंदी की कहानियां और श्लोक सुनती थी, जो सुनने के बाद भी लंबे समय तक मेरे मन में बसे रहते थे. समय के साथ, मुझे एहसास हुआ कि हिंदी सिर्फ बोलने की भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी भावना है. एक अभिनेत्री के रूप में, यह मुझे पार्वती के भावों को गहराई से समझने और देश भर के दर्शकों से जुड़ने में मदद करती है. विश्व हिंदी दिवस पर, मैं उस भाषा का जश्न मनाती हूं जो घर जैसी लगती है और फिर भी सबकी है.”

समावेशिता और पहचान को खूबसूरती से एक साथ जोड़ती है-

छोटे पर्दे की जानी-मानी अभिनेत्री सुम्बुल तौकीर खान  ने कहा, “हिंदी भाषा में एक अलग ही तरह की गहराई और अपनापन है. हिंदी में वो शक्ति है जो इसे अलग-अलग क्षेत्रों, लहजों और पृष्ठभूमियों तक ले जाती है, और हर जगह अपनी गर्माहट और भावनात्मक गहराई बनाए रखती है. यह समावेशिता और पहचान को खूबसूरती से एक साथ जोड़ती है.

विश्व हिंदी दिवस पर, मुझे हिंदी में बनी कहानियों का हिस्सा होने पर गर्व महसूस होता है क्योंकि ये सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं; ये हमें जोड़ती हैं, सुकून देती हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं.”