एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि व्यापार बढ़ाने के लिए बना Asia Africa Agri Alliance

भारत में आयोजित एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक के दौरान Asia Africa Agri Alliance की औपचारिक शुरुआत की गई. यह मंच एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नीति समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है.

एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि व्यापार बढ़ाने के लिए बना Asia Africa Agri Alliance

भारत में आयोजित एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक गोलमेज बैठक के दौरान एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस (AAAA) की औपचारिक शुरुआत की गई. यह नया संस्थागत मंच एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि सहयोग, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है.

मिलेट समिट और एग्री एंड बायोवेस्ट कॉन्क्लेव के साथ आयोजित-

यह कार्यक्रम गुरुग्राम स्थित द लीला एम्बिएंस होटल में आयोजित हुआ, जो मेज एवं मिलेट समिट और एग्री एंड बायोवेस्ट कॉन्क्लेव 2026 के साथ आयोजित किया गया था. इसमें दस से अधिक देशों के राजदूत, वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता और एग्रीबिजनेस क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए.

एक संगठित मंच प्रदान-

एशिया और अफ्रीका वैश्विक कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और दोनों क्षेत्रों के बीच कृषि व्यापार पहले से ही सालाना 90 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है. इसी पृष्ठभूमि में एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस को एक सेक्शन-8 गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित किया गया है, जो कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में व्यापार, निवेश, नीति सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक संगठित मंच प्रदान करेगा.

वैश्विक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव-

गोलमेज बैठक की अध्यक्षता अतुल चतुर्वेदी, एक्जीक्यूटिव चेयरमैन, श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड ने की. उन्होंने कहा कि एशिया और अफ्रीका की क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि इन्हें प्रभावी रूप से जोड़ा जाए तो वैश्विक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है.उन्होंने कहा कि अफ्रीका के पास विशाल कृषि क्षमता और उपजाऊ भूमि है, जबकि एशिया ने प्रसंस्करण, आपूर्ति श्रृंखला और कृषि प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके अनुसार, एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस जैसे मंच इन क्षमताओं को व्यावहारिक साझेदारियों में बदलने में मदद करेंगे.

कृषि क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व पर जोर-

कार्यक्रम में डॉ. अशोक दलवाई, अध्यक्ष, कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग और पूर्व सीईओ, नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी ने भी कृषि क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अफ्रीकी देशों के साथ भारत का कृषि सहयोग लगातार बढ़ रहा है और ऐसे मंच ज्ञान आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकते हैं.

कई देशों के राजनयिकों,दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया-

इस गोलमेज बैठक में यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, स्पेन, हंगरी और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों के राजनयिकों के साथ-साथ चाड, नाइजर और बेनिन के दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया.चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने नियामकीय समन्वय, निवेश की तैयारी, बाजार तक पहुंच और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसी चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया, जो दोनों क्षेत्रों के बीच कृषि सहयोग को प्रभावित करती रही हैं.

एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस को पाँच प्रमुख स्तंभों के आधार पर विकसित किया गया है—

1.व्यापार और बाजार तक पहुंच

2.प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग

3.निवेश और वित्तपोषण

4.नीति और मानक समन्वय

5.ज्ञान आदान-प्रदान के माध्यम से क्षमता निर्माण.

कनेक्टिविटी, तकनीकी साझेदारी और निवेश पहलों को समर्थन-

कैलाश सिंह, संयोजक, एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस के अनुसार, यह मंच एशिया-अफ्रीका कृषि कॉरिडोर, फार्म-टू-मार्केट कनेक्टिविटी, तकनीकी साझेदारी और निवेश सुविधा जैसी पहलों को भी समर्थन देगा.

कार्यक्रम का समापन-

भविष्य की साझेदारियों पर चर्चा और नीति-निर्माताओं, राजनयिकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों के बीच नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ.

एक गैर-लाभकारी संस्थागत मंच-

एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस (AAAA) एक गैर-लाभकारी संस्थागत मंच है, जिसका उद्देश्य एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नीति सहयोग को बढ़ावा देना है. यह मंच सरकारों, एग्रीबिजनेस कंपनियों, निवेशकों और विकास संस्थानों को जोड़कर कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में टिकाऊ साझेदारियों को बढ़ावा देने का प्रयास करता है.