जन्म के 40 मिनट के भीतर डॉक्टरों ने बचाई नवजात की जान, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला की टीम ने किया चमत्कार

दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में डॉक्टरों की टीम ने जन्म के 40 मिनट के भीतर एक गंभीर हृदय रोग से पीड़ित नवजात की सफल सर्जरी कर उसकी जान बचाई. बच्चे के दिल का वाल्व बहुत संकरा था और दिल के आसपास तरल पदार्थ जमा था. डॉक्टरों ने गोल्डन आवर में बैलून एओर्टिक वॉल्वोटॉमी प्रक्रिया कर उसकी जान बचा ली.

जन्म के 40 मिनट के भीतर डॉक्टरों ने बचाई नवजात की जान, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला की टीम ने किया चमत्कार

जन्म के कुछ ही मिनटों बाद जब जिंदगी और मौत के बीच जंग शुरू हो जाए, तो हर पल कीमती हो जाता है. ऐसी ही एक दिल दहला देने वाली स्थिति में एक नवजात को जन्म के मात्र 40 मिनट बाद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया. उसका नन्हा सा दिल तरल पदार्थ से घिरा हुआ था और ठीक से काम नहीं कर पा रहा था, जो जन्मजात हृदय रोग का संकेत था. अनिश्चितताओं और डर के बीच डॉक्टरों की सटीक चिकित्सा, परिवार की दृढ़ता और मानवीय साहस ने आखिरकार उम्मीद की किरण जगाई.

अजन्मे बच्चे के दिल में गंभीर समस्या-

यह एक परिवार के लिए बेहद कठिन और डराने वाला समय था. गर्भावस्था के दौरान ही डॉक्टरों ने बता दिया था कि बच्चे के दिल में गंभीर समस्या है, जिससे परिवार लगातार चिंता और अनिश्चितता में था.दरअसल, प्रेग्नेंसी के करीब 30वें हफ्ते में जब अल्ट्रासाउंड किया गया तो पता चला कि अजन्मे बच्चे के दिल का एक वाल्व बहुत ज्यादा संकरा है. साथ ही दिल की मांसपेशियां कमजोर थीं और दिल के आसपास तरल पदार्थ भी जमा हो रहा था. इन सब वजहों से बच्चे की हालत काफी गंभीर हो सकती थी.

मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने पहले से ही पूरी योजना तैयार-

ऐसी स्थिति में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के डॉक्टरों की टीम ने पूरा मामला संभाला. डॉ. नीरज अवस्थी और उनकी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने पहले से ही पूरी योजना तैयार कर ली थी कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद क्या-क्या कदम उठाने होंगे. 31वें हफ्ते में एक दूसरे अस्पताल में सी-सेक्शन के जरिए बच्चे का जन्म हुआ. जन्म के तुरंत बाद ही डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पूरी टीम तैयार थी. सिर्फ 15 मिनट के अंदर बच्चे को जरूरी ट्यूब लगाकर स्थिर किया गया और फिर एंबुलेंस से फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला लाया गया.

बैलून एओर्टिक वॉल्वोटॉमी नाम की एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया-

जन्म के करीब 40 मिनट के भीतर डॉक्टरों ने बैलून एओर्टिक वॉल्वोटॉमी नाम की एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया की, जिससे दिल के संकरे वाल्व को खोला गया। यह बेहद नाजुक प्रक्रिया थी, लेकिन डॉक्टरों की सटीक योजना और टीमवर्क की वजह से ऑपरेशन सफल रहा.

सही समय पर सही इलाज और डॉक्टरों की विशेषज्ञता-

जांच में बाद में पता चला कि बच्चे का दिल अब ठीक से काम कर रहा है और वाल्व भी सही तरह खुल गया है. इसके बाद बच्चे को नियोनेटल नर्सरी में रखा गया, जहां कुछ हफ्तों तक उसकी देखभाल और रिकवरी पर ध्यान दिया गया. धीरे-धीरे बच्चे की हालत बेहतर होती गई और आखिरकार उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. यह मामला दिखाता है कि सही समय पर इलाज, डॉक्टरों की विशेषज्ञता और परिवार के साहस से असंभव लगने वाली स्थिति भी बदल सकती है.