समर्पण उत्सव 2025 ने भव्यता और संस्कृति की छटा बिखेरी
समर्पण उत्सव 2025... साधना से समर्पण तक: भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की भव्य प्रस्तुति नई दिल्ली में आयोजित.
राजधानी दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में समर्पण कला केंद्र , का वार्षिक सांस्कृतिक समारोह समर्पण उत्सव 2025 भव्यता के साथ आयोजित हुआ, जिसमें 120 से अधिक कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियाँ दीं. कार्यक्रम में दर्शकों का उत्साह और तालियों की गूंज देर तक सभागार में प्रतिध्वनित होती रही.
इसका उद्देश्य-
समर्पण कला केंद्र, जिसकी स्थापना गुरु ऋतु गुप्ता द्वारा एक दशक पूर्व युवा पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी, कथक, भरतनाट्यम और शास्त्रीय संगीत की पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करता है और आज 200 से अधिक विद्यार्थियों का परिवार बन चुका है. समर्पण उत्सव संस्था के विद्यार्थियों के वर्षभर के परिश्रम, साधना और सीखने की यात्रा का मंचीय उत्सव है, जहाँ उभरते कलाकार और वरिष्ठ गुरु एक ही मंच पर प्रस्तुति देकर कला की निरंतरता का संदेश देते हैं.
आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार-
कार्यक्रम की शुरुआत माँ दुर्गा को समर्पित स्तुति ‘देवी भजो’ से हुई, जिसे गुरु रानी खानम जी ने कोरियोग्राफ किया था, और जिसने पूरे सभागार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया.
कोरियोग्राफी-भक्ति-भाव से भरी-
सभी बंदिश की कोरियोग्राफी गुरू रीतू गुप्ता, बृजेश गुप्ता अनन्या गुप्ता द्वारा किया गया वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘सरगम’ (तीन ताल) ने कथक की तकनीकी गहराई तिहाई, तुकड़े, लड़ी और गत निकास का शानदार प्रदर्शन किया. इसके बाद तुलसीदास रचित ‘श्री रामचंद्र कृपालु भज मन’ की भक्ति-भाव से भरी प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया, जिसके पश्चात तीन ताल में शुद्ध नृत्य ने तकनीक और अध्यात्म का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत किया. ‘शिव तांडव’ की ऊर्जावान प्रस्तुति पखावज के दमदार बोल और तांडव अंग की शक्ति ने माहौल में दिव्य शक्ति की अनुभूति कराई.
विशेष आकर्षण का केंद्र बने नन्हे कलाकार-
भरतनाट्यम शैली में नन्हे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘अच्युतम केशवम्’ विशेष आकर्षण रहा, जिसने मंच को भक्ति और मासूमियत से भर दिया. इसके बाद छोटे विद्यार्थियों की ‘तीन ताल तराना’ ने ऊर्जा और उत्साह से सभागार को जीवंत कर दिया. ‘चतुरंग’, ‘कृष्ण वंदना’, ‘नृत्यत शंकर’, और पंडित बिंदादिन महाराज की रचना ‘निरतत धंग’ जैसी प्रस्तुतियों ने कथक की संरचना, भाव, लय, ताल और परंपरा की गहराई को सुंदरता से प्रदर्शित किया. छह वर्ष के बच्चों की ‘गणेश वंदना’ कार्यक्रम का सबसे स्नेहमयी क्षण रहा, जिसे दर्शकों ने मुस्कुराहट और गर्मजोशी से स्वीकार किया. ‘कान्हा नाही मानत’, ‘राम जनार्दन’, ‘झपताल’, और कृष्ण भक्ति से भरा प्रभावशाली कृष्ण भजन भी विशेष रूप से सराहा गया. समापन प्रस्तुति ‘थुंगा थुंगा’ पंडित बिरजू महाराज की रचना ने ताल और लय के अद्भुत आनंद से पूरे सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया, और दर्शकों ने कलाकारों को खड़े होकर तालियों से सम्मानित किया.
गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता का सशक्त प्रमाण-
समर्पण उत्सव 2025 भारतीय शास्त्रीय कला की जीवंतता, सांस्कृतिक विरासत और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता का सशक्त प्रमाण बनकर उभरा. यह आयोजन न केवल कला के संरक्षण और संवर्धन का माध्यम है, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए प्रेरणा और पहचान का गरिमामय मंच भी.