International Men’s day: सोनी सब के कलाकारों ने अन्तर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर बताई मौर्डन मर्दानगी की नई सोच

International Men’s Day पर सोनी सब के एक्टर्स शेयर कर रहे हैं कि कैसे उनके किरदार दिखाते हैं कि आज का पुरुष कैसा है ज्यादा वास्तविक, ज्यादा जुड़ा हुआ और ज्यादा प्रेरणादायक.

International Men’s day: सोनी सब के कलाकारों ने अन्तर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पर बताई मौर्डन मर्दानगी की नई सोच

हर साल 19 नवंबर को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है. यह दिवस न केवल पुरुषों की उपलब्धियों  सम्मानित करता है, बल्कि समाज में उनके कल्याण, सुरक्षा और समानता के लिए महत्वपूर्ण चर्चा और जागरूकता फैलाने का माध्यम भी बनता जा रहा है. इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए सोनी सब के एक्टर्स शेयर कर रहे हैं कि कैसे उनके किरदार दिखाते हैं कि आज का पुरुष कैसा है ज्यादा वास्तविक, ज्यादा जुड़ा हुआ और ज्यादा प्रेरणादायक.

मॉर्डन युग की मर्दानगी-

दुनिया जब 19 नवंबर को इंटरनेशनल मेंस  डे मना रही है,मॉर्डन युग की मर्दानगी को लेकर बातचीत पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. आज टीवी पर ऐसे किरदार दिखाए जा रहे हैं, जो संवेदनशीलता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और करुणा को प्रमुखता देते हैं.

गौरव चोपड़ा- हीलिंग कमजोरी नहीं-

पुष्पा इम्पॉसिबल में राजवीर शास्त्री का रोल निभा रहे एक्टर  गौरव चोपड़ा का कहना है, “इंटरनेशनल मेन्स डे मुझे हमेशा उन पुरुषो की याद दिलाता है. जो चुपचाप खुद को फिर से जोड़ने की कोशिश कर रहे होते हैं. यह मुझे राजवीर की याद दिलाता है. एक ऐसा सफल आदमी, जो दर्दनाक अतीत के बाद खुद को संभाल रहा है. जो अपने दुख को गुस्से के पीछे छुपाता है क्योंकि उसे और तरीका नहीं आता. इस किरदार को निभाते हुए एहसास हुआ कि असल ज़िंदगी में कितने पुरुष ऐसा ही करते हैं. मैंने सीखा कि हीलिंग कमजोरी नहीं है; कई बार यह वह सबसे बहादुर काम होता है जो कोई पुरुष कर सकता है.” 

रजत वर्मा-ऐसे पुरुष देखे जो प्यार दिखाते थे चुपचाप-

इत्ती सी खुशी में विराट का रोल निभा रहे एक्टर रजत वर्मा  ने कहाँ, “बचपन से मैंने ऐसे पुरुष देखे जो प्यार दिखाते थे चुपचाप बिना कहे चीजें ठीक कर देते, बिना शोर मचाए हमेशा साथ खड़े रहते. मेरा किरदार विराट भी उसी कोमल ताकत की जगह से आता है. इंटरनेशनल मेन्स डे पर मैं उन पुरुषों के बारे में सोचता हूं जो रूढ़ियों से दूर, धैर्य, सहानुभूति और स्थिरता के साथ जीवन जीते हैं. विराट को निभाते हुए मुझे अहसास हुआ कि कई बार सबसे मुलायम ताकत ही सबसे टिकाऊ होती है.” 

ऋषि सक्सेना- जिम्मेदारी और गर्माहट साथ-साथ चल सकती हैं-

इत्ती सी खुशी में इंस्पेक्टर संजय भोसले का रोल निभा रहे ऋषि सक्सेना ने कहां,“मेरी जिंदगी में ऐसे कई पुरुष आए मेंटर्स, परिवार, सहकर्मी जिन्होंने सिखाया कि जिम्मेदारी और गर्माहट साथ-साथ चल सकती हैं. मेरा किरदार संजय भी उसी संतुलन को दर्शाता है; वह अधिकार रखता है, लेकिन उसके भीतर एक गहरी भावनात्मक ईमानदारी भी है. इस इंटरनेशनल मेन्स डे पर याद आता है कि पुरुषों को मजबूत और संवेदनशील होने के बीच चुनाव नहीं करना चाहिए.दोनों साथ रह सकते हैं और अक्सर रहते भी हैं.”

करण सुचाक-पुरुषों को भावनात्मक विस्तार की अनुमति मिलनी ही चाहिए-

गाथा शिव परिवार की गणेश कार्तिकेय में इन्द्र देव का रोल निभा रहे करण सुचाक का कहना है, “पौराणिक किरदारों को निभाते हुए मैंने सीखा है कि शक्ति कभी एक-आयामी नहीं होती. इंद्र देव का किरदार निभाते हुए भी गर्व, संवेदनशीलता, झिझक सब के पल आते हैं. वे सभी भावनाएँ, जिन्हें हम अकसर भूल जाते हैं कि पुरुष भी महसूस करते हैं. इंटरनेशनल मेन्स डे पर मुझे लगता है कि पुरुषों को इस भावनात्मक विस्तार की अनुमति मिलनी ही चाहिए. अगर एक सीख मिली है, तो वह यह कि पूर्णता का दिखावा करने से कहीं अधिक प्रभावशाली है असली होना.”
 
इस दिन की शुरुआत-

आपको बता दें अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की शुरुआत 7 फरवरी 1992 को थॉमस ओस्टर द्वारा की गई थी. इसका प्रारंभिक विचार एक साल पहले 8 फरवरी 1991 को सामने आया था. 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो में इसे पुनर्जीवित किया गया.