डेढ़ साल से कैंसर से जूझ रहा ऑस्ट्रेलियाई मरीज, भारत में 2 दिन में हुआ फिट
फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसर में 45 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई मरीज का रेक्टल कैंसर एडवांस रोबोटिक TAMIS सर्जरी से सफलतापूर्वक हटाया गया. इस प्रक्रिया में न पेट पर चीरा लगा और न ही स्टोमा बैग की जरूरत पड़ी. मरीज को सिर्फ दो दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल गई और वह कैंसर-मुक्त होकर ऑस्ट्रेलिया लौट गया.
कैंसर के इलाज में नई तकनीकों की वजह से अब मरीजों को पहले की तुलना में कम दर्द और तेजी से रिकवरी का फायदा मिल रहा है. इसका ताजा उदाहरण फोर्टिस हॉस्पिटल, मानेसर में देखने को मिला, जहां ऑस्ट्रेलिया के 45 वर्षीय मरीज सैमी का एडवांस रोबोटिक सर्जरी के जरिए सफल इलाज किया गया.
रेक्टल कैंसर से जूझता मरीज-
सैमी पिछले करीब डेढ़ साल से रेक्टल कैंसर से जूझ रहे थे. ऑस्ट्रेलिया में उन्होंने कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी भी करवाई थी. शुरुआत में ट्यूमर छोटा हुआ, लेकिन बाद में कैंसर दोबारा उभरने लगा. वहां के डॉक्टरों ने उन्हें बड़ी सर्जरी की सलाह दी थी, जिसमें पेट में चीरा लगाने के साथ कुछ समय के लिए स्टोमा बैग भी लगाना पड़ सकता था.
रोबोटिक ट्रांसएनल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी-
हालांकि, सैमी ने भारत के फोर्टिस हॉस्पिटल, मानेसर से संपर्क किया. जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें रोबोटिक ट्रांसएनल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (TAMIS) के लिए उपयुक्त पाया. इस तकनीक की खास बात यह है कि सर्जरी प्राकृतिक मल-मार्ग के जरिए की जाती है और पेट पर कोई चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी-
फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. विनय सैमुअल गायकवाड़ के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की. ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया और मरीज को न तो स्टोमा बैग की जरूरत पड़ी और न ही शरीर पर कोई निशान बना.
यह तकनीक खास तौर पर चुनिंदा मरीजों के लिए फायदेमंद-
सर्जरी के बाद सैमी की रिकवरी काफी तेज रही और उन्हें सिर्फ दो दिन के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. डॉक्टरों के मुताबिक, यह तकनीक खास तौर पर कुछ चुनिंदा मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है क्योंकि इससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है. सैमी ने बताया कि जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया में बड़ी सर्जरी और स्टोमा बैग के बारे में बताया गया था तो वे काफी परेशान हो गए थे. लेकिन फोर्टिस मानेसर में उन्हें ऐसा इलाज मिला, जिससे बिना बड़े ऑपरेशन के ही कैंसर का सफल उपचार हो गया। उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल की पूरी टीम का धन्यवाद किया.