Father's Day Spl.: जब पिताओं ने अपने बच्चों के लिए किया जीवनदान
फादर्स डे पर दो पिताओं ने अपने किडनी रोग से पीड़ित बच्चों को गुर्दा दान कर नई जिंदगी दी. फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में हुए सफल ट्रांसप्लांट ने पिता के निस्वार्थ प्रेम और अंगदान के महत्व को उजागर किया.
पिता का प्यार अक्सर शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण से झलकता है। फादर्स डे के मौके पर ऐसे ही दो प्रेरणादायक मामलों ने यह साबित कर दिया कि अपने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए पिता किसी भी हद तक जा सकते हैं. हिसार के 34 वर्षीय राहुल और अलीगढ़ की 26 वर्षीय दिशा, दोनों गंभीर किडनी रोगों से जूझ रहे थे. उनकी जिंदगी को नई उम्मीद तब मिली जब उनके पिताओं ने अपना गुर्दा दान कर उन्हें नया जीवन दिया.
बेटे को अपना गुर्दा दान करने का फैसला किया-
राहुल पिछले छह महीनों से एंड स्टेज किडनी रोग के कारण डायलिसिस पर थे. लगातार कमजोरी, भूख न लगना, वजन तेजी से कम होना और सप्ताह में तीन बार डायलिसिस की मजबूरी ने उनकी जिंदगी मुश्किल बना दी थी. उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए परिवार ने फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा का रुख किया. जांच के बाद डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट को सबसे बेहतर विकल्प बताया. राहुल की मां स्वास्थ्य कारणों से डोनर नहीं बन सकीं, तब उनके पिता ने आगे आकर अपना गुर्दा दान करने का फैसला किया.सफल प्रत्यारोपण के बाद राहुल अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं.

बेटी को किडनी दान की-
वहीं अलीगढ़ की दिशा को पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज नामक आनुवांशिक बीमारी का पता चला था, जो धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाती है. फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में हुई जांच और जेनेटिक टेस्टिंग में पता चला कि यह बीमारी उन्हें मां की ओर से विरासत में मिली है, जबकि उनके पिता इस जीन के वाहक नहीं थे. हालांकि डोनर बनने से पहले उनके पिता को अपना वजन कम करना पड़ा. आवश्यक स्वास्थ्य मानकों को पूरा करने के बाद उन्होंने बेटी को किडनी दान की और ट्रांसप्लांट सफल रहा. आज दिशा स्वस्थ हैं और अपने पेशे में पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रही हैं.

परिवार के मजबूत रिश्तों का भी प्रतीक हैं-
फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा की डायरेक्टर नेफ्रोलॉजी डॉ. अनुजा पोरवाल के अनुसार, किडनी फेलियर के मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी उपचारों में से एक है, जो बेहतर जीवन गुणवत्ता और लंबा जीवन प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि ये दोनों मामले केवल चिकित्सा सफलता की कहानी नहीं हैं, बल्कि पिता के निस्वार्थ प्रेम, साहस और परिवार के मजबूत रिश्तों का भी प्रतीक हैं.

दूसरा जीवन देने वाले पिता-
फादर्स डे पर सामने आई ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि पिता सिर्फ जीवन देने वाले ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने बच्चों को दूसरा जीवन देने वाले भी होते हैं.