रिसर्च, टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट पर IEEE समिट में विशेषज्ञों का मंथन
IEEE हायर एजुकेशन समिट 2026 में AI, रिसर्च, इनोवेशन और भविष्य की शिक्षा पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने तकनीक-आधारित सीखने, उद्योग-शिक्षा सहयोग और छात्रों को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
IEEE, जो दुनिया का सबसे बड़ा टेक्निकल प्रोफेशनल संगठन है, ने भारत के कई बड़े शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया. इस सम्मेलन में चर्चा की गई कि भारत की निजी यूनिवर्सिटीज़ तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में देश को आगे बढ़ाने में कैसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.
उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी-
IEEE की प्रेसिडेंट और CEO Mary Ellen Randall ने कहा कि AI और नई तकनीकों के तेजी से बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इंजीनियरिंग शिक्षा को और अधिक लचीला बनाना होगा. साथ ही, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी के इंजीनियर भविष्य की चुनौतियों का समाधान कर सकें.
शोधकर्ताओं, शिक्षकों और वैज्ञानिकों को एक मंच-
इस मौके पर Bhim Singh ने IEEE की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन दुनिया भर के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और वैज्ञानिकों को एक मंच देता है, जहां वे ज्ञान साझा कर सकते हैं और नई खोजों को बढ़ावा दे सकते हैं.

सम्मलेन में एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों पर चर्चा-
सम्मेलन में AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने बताया कि निजी यूनिवर्सिटीज़ को अपने कोर्स और पढ़ाई के तरीके समय के अनुसार बदलने होंगे, ताकि छात्र नई तकनीकों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें.
इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कौशल भी सिखाएं-
इसके अलावा, इस बात पर भी जोर दिया गया कि यूनिवर्सिटीज़ सिर्फ डिग्री देने तक सीमित न रहें, बल्कि छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कौशल (Skills) भी सिखाएं, जिससे वे नौकरी और करियर के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें.
वैश्विक स्तर पर पहचान मजबूत-
एक अन्य चर्चा में यह बात सामने आई कि भारत की यूनिवर्सिटीज़ को सिर्फ रैंकिंग पर नहीं, बल्कि रिसर्च, इनोवेशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने पर भी ध्यान देना चाहिए. इससे वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकेंगी.