FCCI इंटरनेशनल फ़ोरम: “विकसित भारत 2047” के विज़न और वैश्विक सहमति-निर्माण क्षमता पर संवाद
FCCI इंटरनेशनल फ़ोरम ने “विकसित भारत 2047” के विज़न पर केंद्रित संवाद के माध्यम से भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमति-निर्माण की उसकी बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया.
फाउंडेशन फॉर क्रिटिकल चॉइसेस फॉर इंडिया (एफसीसीआई) 19 और 20 दिसंबर 2025 को इंडिया हैबिटैड सेंटर, नई दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रवासी सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों, नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, विद्वानों और थिंक-टैंक नेताओं को एक मंच पर लाएगा, ताकि भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा पर विचार-विमर्श किया जा सके.
“भारतीय प्रवासी: भारत की प्रगति के लिए समर्पित” थीम के तहत आयोजित यह सम्मेलन प्रवासी समुदाय को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में स्थापित करने और भारत के परिवर्तन अभियान के साथ उनकी भागीदारी को और मजबूत करने का लक्ष्य रखता है. FCCI का मानना है कि प्रवासी भारतीयों का वैश्विक अनुभव, शैक्षणिक बढ़त और विभिन्न देशों में उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा, नवाचार, शासन सुधार और सतत विकास जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

आयोजन दो मुख्य विषयों पर केंद्रित-
दो दिवसीय यह आयोजन दो मुख्य विषयों पर केंद्रित होगा. पहले दिन का फोकस “विकसित भारत (Viksit Bharat): 2047 तक भारत के भविष्य का रोडमैप” पर होगा, जिसमें आर्थिक विकास में तेजी, संस्थागत सुधार, शिक्षा, तकनीक और अवसंरचना पर चर्चा शामिल होगी. दूसरे दिन की थीम “नई वैश्विक व्यवस्था: वैश्विक सहमति-निर्माण में लोकतांत्रिक भारत की भूमिका” पर केंद्रित होगी, जिसमें वैश्विक शासन, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारी में भारत के बढ़ते प्रभाव का छानबीन की जाएगी.
अंतरराष्ट्रीय संवाद और साझेदारियों का नेतृत्व-
सम्मेलन नीति-निर्माताओं, विचारकों और प्रभावशाली प्रवासी भारतीयों को एक ही मंच पर लाकर विचारों का आदान-प्रदान करने और ऐसी रणनीतियाँ विकसित करने का अवसर देगा, जो भारत के विकास और उसकी वैश्विक भूमिका को मजबूत कर सकें। FCCI का दृष्टिकोण है कि भारत न केवल आर्थिक रूप से विकसित राष्ट्र बने, बल्कि एक वैश्विक सहमति-निर्माता के रूप में अंतरराष्ट्रीय संवाद और साझेदारियों का नेतृत्व भी करे. चर्चाओं का फोकस इस बात पर होगा कि ज्ञान-आदान-प्रदान, निवेश और वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से प्रवासी समुदाय की सामूहिक शक्ति किस प्रकार भारत की विकास यात्रा को तीव्र कर सकती है और विश्व मंच पर उसकी स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है.
India@2047 के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में योगदान-
FCCI ने कहा कि तेजी से जुड़ते वैश्विक वातावरण में भारतीय प्रवासी समुदाय राष्ट्र-निर्माण में एक विशिष्ट और प्रभावशाली भूमिका निभाने की क्षमता रखता है. सम्मेलन से ऐसे संगठनों और व्यक्तियों के बीच सार्थक सहयोग की उम्मीद है, जो भारत की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध हैं, और यह भारतीय मूल के अगली पीढ़ी के वैश्विक नेताओं को भी प्रेरित करेगा. अपनी एकता, विविधता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए, FCCI ने कहा कि यह आयोजन India@2047 के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में योगदान देगा और भारतीय संविधान के मूल्यों पर आधारित एक समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र के निर्माण की राह को चिन्हित करेगा.एक ऐसी राह जिसे देश और विदेश दोनों स्थानों पर सामूहिक प्रयासों से साकार किया जाएगा.
सक्रिय भागीदार के रूप में-
डॉ. प्रमोद अग्रवाल, वाइस प्रेसिडेंट, FCCI और CEO, SaXcell Ltd ने कहा, “यूरोप में बसे उच्च-प्रशिक्षित और एंट्रप्रेन्योर भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य होने के नाते, हम अपनी जिम्मेदारी और अपने सौभाग्य दोनों को भली-भांति समझते हैं. हम सक्रिय भागीदार के रूप में आते हैं, भारत सरकार के साथ मिलकर सहायता करने, योगदान देने और कार्य करने के लिए तैयार. हमारा वैश्विक अनुभव और भारत से गहरा भावनात्मक लगाव हमें एक विशिष्ट स्थिति में लाता है, जहाँ हम Viksit Bharat 2047 की दिशा में देश की यात्रा का समर्थन कर सकते हैं। हम अपने ज्ञान, नेटवर्क और क्षमताओं को वहीं लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ वे सार्थक प्रभाव पैदा कर सकें.”

क्या हैं फिक्की-
भारत के लिए महत्वपूर्ण विकल्पों का आधार एक स्वतंत्र, सेक्युलर, गैर-व्यावसायिक और गैर-राजनीतिक थिंक टैंक है, जिसकी स्थापना 1980 में की गई और 1981 में नीदरलैंड्स में रजिस्टर किया गया. इसका प्रथम संविधान 1980 में तैयार किया गया था, जिसे बाद में 1984 में संशोधित किया गया. वर्षों के दौरान, FCCI एक सम्मानित मंच के रूप में विकसित हुआ है, जो सूचित संवाद और प्रवासी भागीदारी को बढ़ावा देता है. इसके बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर और एंट्रप्रेन्योर शामिल हैं.
मुख्य उद्देश्य-
FCCI का मुख्य उद्देश्य भारत के सामने मौजूद महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान, परिभाषा और विश्लेषण करना तथा उनके दीर्घकालिक एवं तार्किक समाधान की दिशा में कार्य करना है. संगठन का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों के नैतिक, बौद्धिक और वित्तीय संसाधनों को एकत्रित कर भारत के विकास में सार्थक योगदान देना है. यह भारत और वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के व्यापक हितों को स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने और बढ़ावा देने का भी प्रयास करता है. इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, FCCI राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अध्ययन, रिसर्च, चर्चाएँ और सम्मेलन आयोजित करता है. यह नीति-निर्माताओं, विचार-नेताओं और ओपीनियन-मेकरों के साथ संवाद कर सूचित पब्लिक विमर्श और साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णयों को सशक्त बनाने में योगदान देता है. संगठन भारत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य कर रहे व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ भी सहयोग करता है. साथ ही, FCCI भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों में प्रवासी भारतीयों के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयासरत है, ताकि उनकी दृष्टि और अनुभव भारत की फ़ॉर्मल इंस्टिट्यूशनल फ़्रेमवर्क्स में शामिल हो सके. आज, जब भारत उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है, FCCI बदलते वैश्विक लैंडस्केप के अनुरूप स्वयं को और अधिक उपयुक्त बना रहा है.

मुख्य फोकस-
इसका फोकस नए महत्वपूर्ण मुद्दों और नवाचारी परियोजनाओं को अपनाने, समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाने और युवा भारतीय बुद्धिजीवियों को इसके मिशन और गतिविधियों में शामिल करने पर है.