दुर्लभ जेनेटिक हार्ट डिजीज से जूझे दो भाई, दोनों को मिला नया जीवन
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में एक ही परिवार के दो भाइयों का 11 साल के अंतराल में सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. दोनों भाई दुर्लभ आनुवंशिक हृदय रोग डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी से पीड़ित थे. डॉक्टरों ने इसे भारत के सबसे अनोखे हार्ट ट्रांसप्लांट मामलों में से एक बताया है.
एक ही परिवार के दो भाइयों को दिल की एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया. बड़े भाई को किशोरावस्था से ही थकान, सांस फूलना और हार्ट फेल जैसी समस्याएं होने लगी थीं. जांच में पता चला कि उन्हें डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी नाम की गंभीर हृदय बीमारी है, जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर होकर सही तरीके से खून पंप नहीं कर पातीं. हालत बिगड़ने पर साल 2015 में फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में उनका हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया.
आनुवंशिक हृदय रोग से पीड़ित-
करीब 11 साल बाद छोटे भाई में भी बिल्कुल ऐसे ही लक्षण दिखाई देने लगे. शुरुआत में सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी महसूस हुई, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. जांच में सामने आया कि वह भी उसी आनुवंशिक हृदय रोग से पीड़ित हैं और उनका हार्ट फेल हो चुका है. डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट को ही एकमात्र इलाज बताया.
दो भाइयों का 11 साल के अंतराल में हार्ट ट्रांसप्लांट-
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के डॉक्टरों की टीम ने कई तकनीकी चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक छोटे भाई का हार्ट ट्रांसप्लांट किया. डॉक्टरों के अनुसार, यह भारत का शायद पहला मामला है जिसमें एक ही परिवार के दो भाइयों का 11 साल के अंतराल में एक ही अस्पताल और एक ही सर्जिकल टीम द्वारा हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया.

आधुनिक हार्ट ट्रांसप्लांट तकनीक से मरीजों को नया जीवन-
डॉ. ज़ेड. एस. मेहरवाल ने बताया कि यह मामला दिखाता है कि आनुवंशिक हृदय रोग कितने खतरनाक हो सकते हैं और समय पर जांच व आधुनिक हार्ट ट्रांसप्लांट तकनीक से मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है. डॉक्टरों ने परिवार के अन्य सदस्यों की भी हृदय जांच कराने की सलाह दी है.