अंगदान बना जीवनदान, फरीदाबाद की महिला ने लंग ट्रांसप्लांट के बाद जीती नई जिंदगी
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में हुए सफल बाईलेटरल लंग ट्रांसप्लांट के बाद 65 वर्षीय महिला ने एक साल पूरा कर लिया है.अब वह बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के सामान्य जीवन जी रही हैं.
फरीदाबाद की 65 साल की एक महिला के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया था. स्क्लेरोडर्मा नाम की गंभीर बीमारी की वजह से उनके दोनों फेफड़े बुरी तरह खराब हो चुके थे और उन्हें हर समय ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ती थी. हालत इतनी खराब थी कि वो ठीक से बात तक नहीं कर पाती थीं.
बाईलेटरल लंग ट्रांसप्लांट-
इसके बाद नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में उनका बाईलेटरल लंग ट्रांसप्लांट किया गया. यह दिल्ली के किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में हुआ पहला सफल लंग ट्रांसप्लांट था. अब इस सर्जरी को एक साल पूरा हो चुका है और सबसे बड़ी बात ये है कि महिला अब बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के सामान्य जिंदगी जी रही हैं.
सात घंटे जटिल सर्जरी-
यह ट्रांसप्लांट नोएडा के एक ब्रेन-डेड मरीज के परिवार द्वारा अंगदान करने की वजह से संभव हो पाया. करीब सात घंटे चली इस जटिल सर्जरी के बाद महिला की रिकवरी भी आसान नहीं थी. उन्हें लंबे समय तक वेंटिलेटर, कई मेडिकल प्रक्रियाओं और लगातार इलाज से गुजरना पड़ा.
मेडिकल दुनिया की सबसे मुश्किल सर्जरी-
डॉक्टरों का कहना है कि लंग ट्रांसप्लांट मेडिकल दुनिया की सबसे मुश्किल सर्जरी में से एक माना जाता है, क्योंकि सही डोनर मिलना बेहद कठिन होता है. लेकिन डॉक्टरों, रिहैबिलिटेशन टीम और मरीज की इच्छाशक्ति ने मिलकर इस मुश्किल सफर को सफल बना दिया.
धीरे-धीरे सामान्य जीवन-
मरीज ने बताया कि पहले वह हर छोटे काम के लिए दूसरों पर निर्भर थीं, लेकिन अब खुद अपने काम कर पा रही हैं और धीरे-धीरे सामान्य जीवन में लौट रही हैं.