विस्थापन से वैश्विक पहचान तक: सिंधी समाज की प्रेरणादायक यात्रा
सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया का जापान-कोरिया कॉन्क्लेव सिंधी समाज की वैश्विक पहचान, संस्कृति और बिजनेस अवसरों को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें 250+ प्रतिनिधि शामिल होंगे.
जड़ें भले ही ज़मीन से उखड़ जाएं, लेकिन अपने संस्कार कभी नहीं छूटते. इसी सोच के साथ सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया एक बड़ा और खास जापान-कोरिया कॉन्क्लेव करने जा रही है.
विस्थापन से लेकर विश्व में विस्तार-
संस्था के सीनियर एडवाइजर मोहन आहूजा ने बताया कि ये सिर्फ घूमने-फिरने की ट्रिप नहीं है, बल्कि सिंधी समाज की उस कहानी को दिखाने का मौका है, जिसमें उन्होंने “विस्थापन से लेकर विश्व में विस्तार” तक का सफर तय किया है.
बिजनेस और ट्रेड में मजबूत जगह बनाई-
1947 के विभाजन में सब कुछ खोने के बाद भी सिंधी समाज ने हार नहीं मानी. बिना किसी खास सरकारी मदद के, उन्होंने अपने दम पर दोबारा खड़े होकर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि आज पूरी दुनिया में बिजनेस और ट्रेड में मजबूत जगह बना ली है. अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को भी उन्होंने पूरी शिद्दत से संभालकर रखा.
टीम ने कड़ी मेहनत-
इस इंटरनेशनल कॉन्क्लेव को तैयार करने में संस्था के फाउंडर और पूर्व राज्यसभा सांसद सुरेश केसवानी के मार्गदर्शन के साथ, उत्तरी भारत के अध्यक्ष अशोक लालवानी और उनकी टीम ने कड़ी मेहनत की है.
कार्यक्रम का खास मकसद-
इस कार्यक्रम का सबसे खास मकसद है, भगवान झूलेलाल के “वसुधैव कुटुंबकम” के संदेश को जापान तक पहुंचाना. इसके साथ ही जापान की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए MSME सेक्टर में नए बिजनेस मौके और पार्टनरशिप भी बनाई जाएंगी. 17 मई को टोक्यो में जापान चैप्टर की शुरुआत होगी, जिसकी जिम्मेदारी राम पेसुमल कलानी संभालेंगे. इसका मकसद युवाओं को “लोकल से ग्लोबल” बनने के लिए प्रेरित करना है. ये पूरी यात्रा 7 मई से शुरू होगी, जिसमें क्रूज़ ट्रिप, साउथ कोरिया और टोक्यो मुख्य पड़ाव रहेंगे. 19 मई को टोक्यो में बड़ा कॉन्क्लेव होगा और 20 मई को इसका समापन होगा.
अधिकारी, नेता और बिजनेसमैन शामिल-
इसमें 250 से ज्यादा लोग हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें IAS अधिकारी, नेता और बड़े बिजनेसमैन शामिल हैं. RTW टीम (विनोद और कविता) पूरे इवेंट की प्लानिंग और मैनेजमेंट संभाल रही है, और सभी सुविधाओं को लेकर अच्छी तैयारी की गई है.
योगदान देने वाले सभी लोगों को सम्मान-
यात्रा के बाद एक बड़ा सम्मान समारोह भी होगा, जिसमें इस पूरे अनुभव को समाज के साथ साझा किया जाएगा और इसमें योगदान देने वाले सभी लोगों ट्रैवल एजेंट, कलाकार और सहयोगियों को सम्मानित किया जाएगा.
जज़्बे का एक शानदार उदाहरण-
कुल मिलाकर, ये कॉन्क्लेव सिंधी समाज की मेहनत, हिम्मत और कभी हार न मानने वाले जज़्बे का एक शानदार उदाहरण है — जो ये दिखाता है कि हम सिर्फ जीना नहीं, बल्कि आगे बढ़कर जीतना जानते हैं.