NCERT की किताबों में पढ़ाई जाती है सुधा चंद्रन की कहानी, आज भी देती हैं लाखों को प्रेरणा

सुधा चंद्रन ने शो 'तुम हो ना – घर की सुपरस्टार' में अपने संघर्ष और हौसले की कहानी सुनाई। 15 साल की उम्र में पैर खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और डांस की दुनिया में शानदार वापसी कर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गईं.

NCERT की किताबों में पढ़ाई जाती है सुधा चंद्रन की कहानी, आज भी देती हैं लाखों को प्रेरणा

टीवी शो 'तुम हो ना घर की सुपरस्टार' के आने वाले एपिसोड में दर्शकों को एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी देखने को मिलेगी. इस बार शो में मेहमान बनकर पहुंचीं मशहूर अभिनेत्री और क्लासिकल डांसर सुधा चन्द्रन , जिन्होंने अपनी जिंदगी के संघर्ष और हौसले की कहानी साझा की.

बेहद खास पल-

शो के होस्ट राजीव खंडेलवाल से बातचीत के दौरान एक बेहद खास पल तब आया जब सुधा चंद्रन के हेल्पर ने बताया कि उसने बचपन में स्कूल की किताब में उनकी कहानी पढ़ी थी. उसने कहा कि चौथी कक्षा में पढ़ते समय उसने सुधा जी के बारे में पढ़ा था और तब सोचा था कि बड़ा होकर उनसे जरूर मिलेगा.

असल जिंदगी में लोगों के लिए प्रेरणा बनना सबसे बड़ी उपलब्धि-

यह सुनकर सुधा चंद्रन भावुक हो गईं. उन्होंने बताया कि कई राज्यों की स्कूल की किताबों में उनके जीवन पर एक अध्याय शामिल है. उन्होंने कहा कि फिल्मों और टीवी में हीरोइन होना अपनी जगह है, लेकिन असल जिंदगी में लोगों के लिए प्रेरणा बनना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.

सचमुच असली सुपरस्टार कहलाने का हकदार-

राजीव खंडेलवाल ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति की जिंदगी और उपलब्धियों पर स्कूल की किताबों में अध्याय पढ़ाए जाएं, तो वह सचमुच असली सुपरस्टार कहलाने का हकदार होता है.

जीवन के सबसे कठिन दौर को याद किया-

बातचीत के दौरान सुधा चंद्रन ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को भी याद किया. उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ 15 साल की थीं, तब एक भयानक सड़क दुर्घटना में उनका पैर बुरी तरह घायल हो गया था. गैंगरीन फैलने के कारण डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा. उस समय उनके माता-पिता ने उनकी जान बचाने के लिए यह कठिन फैसला लिया.

उन्होंने भरोसा नहीं खोया-

सुधा ने बताया कि हादसे के बाद लोगों को लगता था कि अब उनका डांस करियर खत्म हो गया है. लेकिन उन्होंने मन में ठान लिया था कि वह वापसी जरूर करेंगी. हालांकि उन्हें यह नहीं पता था कि वह कैसे लौटेंगी, लेकिन उन्होंने भरोसा नहीं खोया.

तीन साल की कड़ी साधना के बाद दोबारा मंच पर वापसी-

कुछ समय बाद उन्हें जयपुर फुट के बारे में पता चला, जिसे डॉक्टरों ने उनके लिए उम्मीद की नई किरण बताया. इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और तीन साल की कड़ी साधना के बाद 1984 में दोबारा मंच पर वापसी की.

करियर का सबसे भावुक पल-

अपने करियर के सबसे भावुक पल को याद करते हुए सुधा ने बताया कि उनके पहले स्टेज परफॉर्मेंस के बाद उनके पिता ने उनके पैर छू लिए थे. जब उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों किया, तो उनके पिता ने कहा कि वह अपनी बेटी के नहीं, बल्कि उसके भीतर मौजूद मां सरस्वती के चरण स्पर्श कर रहे हैं.

जिंदगी के बड़े फैसले अक्सर एक पल में- 

सुधा चंद्रन ने कहा कि जिंदगी के बड़े फैसले अक्सर एक पल में लिए जाते हैं. अगर हम ज्यादा सोचते हैं, तो लोगों की बातें हमें कमजोर बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस यह तय किया था कि उन्हें वापस लौटना है, बाकी रास्ता भगवान ने दिखा दिया. शो के दौरान उन्होंने एक बेहद खूबसूरत बात भी कही, जिसने सभी का दिल जीत लिया. उन्होंने कहा, "नाचने के लिए अंगों की जरूरत नहीं होती, नाचने के लिए आत्मा की जरूरत होती है."

हौसला और आत्मविश्वास जिंदगी की मुश्किलों को मात दे सकते हैं-

उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर इंसान के अंदर हौसला और आत्मविश्वास हो, तो वह जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किलों को भी मात दे सकता है. सुधा चंद्रन आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं और उनकी जिंदगी संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल है.

यहां देखें-

'तुम हो ना - घर की सुपरस्टार' हर सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न ⁠और सोनी लिव⁠ पर देखा जा सकता है.