फोर्टिस नोएडा ने रचा इतिहास, दुनिया का पहला लैप्रोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफल
फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा ने लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में वैश्विक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया का पहला लैप्रोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया। 51 वर्षीय मरीज को उनकी दो बेटियों के लिवर डोनेशन से नई जिंदगी मिली। जानिए इस ऐतिहासिक सर्जरी की पूरी कहानी और डॉक्टरों ने इसे क्यों बताया मेडिकल साइंस की बड़ी उपलब्धि।
फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा ने लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया का पहला लैप्रोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया है। यह जटिल सर्जरी किर्गिस्तान के 51 वर्षीय मरीज पर की गई, जो हेपेटाइटिस बी और डी संक्रमण के कारण एंड-स्टेज लिवर डिजीज से जूझ रहे थे।
दोनों डोनर भी पूरी तरह स्वस्थ-
इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. विवेक विज, चेयरमैन, लिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपाटोबिलियरी साइंसेज, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा ने किया। सर्जरी सफल रही और मरीज अब स्वस्थ होकर अस्पताल से घर जा चुके हैं। उनकी दोनों बेटियां, जिनकी उम्र 20 और 21 साल है, ने अपने पिता को लिवर का हिस्सा दान किया। दोनों डोनर भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और तेजी से रिकवर कर चुके हैं।

दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट सर्जरी
यह दुनिया का पहला मामला है, जिसमें दोनों डोनर्स की लिवर डोनेशन सर्जरी पूरी तरह लैप्रोस्कोपिक (मिनिमली इनवेसिव) तकनीक से की गई।
इस तकनीक के कई फायदे हैं, जैसे:-
सर्जरी के दौरान कम दर्द
छोटे चीरे लगने से कम तकलीफ
कम रक्तस्राव
जल्दी रिकवरी
अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना
दोनों बेटियों की सर्जरी करीब 5-5 घंटे चली, जबकि मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट लगभग 8 घंटे में पूरा हुआ।
मरीज की हालत थी बेहद गंभीर-
जब मरीज को फोर्टिस नोएडा लाया गया, तब वह लिवर फेलियर की गंभीर अवस्था में थे। उन्हें पीलिया, पेट में पानी भरना, बार-बार ब्लीडिंग होना और बेहोशी जैसी समस्याएं थीं। जांच में पता चला कि उनका लिवर हेपेटाइटिस बी और डी संक्रमण की वजह से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। साथ ही प्लेटलेट्स की संख्या बेहद कम थी और खून जमने में भी दिक्कत आ रही थी।
क्यों करना पड़ा डुअल-लोब ट्रांसप्लांट?
डॉक्टरों के अनुसार मरीज के शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ही डोनर का लिवर पर्याप्त नहीं था। ऐसे में मेडिकल टीम ने मरीज की दोनों बेटियों के लिवर का हिस्सा लेकर डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया।

दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट सर्जरी-
डॉ. विवेक विज ने कहा कि डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट सर्जरी में से एक मानी जाती है और इसे दुनिया के बहुत कम मेडिकल सेंटर ही कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों डोनर्स की सर्जरी को पूरी तरह लैप्रोस्कोपिक तकनीक से करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इससे डोनर्स को कम दर्द होता है, जल्दी रिकवरी होती है और उनकी सुरक्षा भी बेहतर रहती है। यह तकनीक भविष्य में उन मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिन्हें बड़े लिवर ग्राफ्ट की जरूरत होती है।
फोर्टिस ने जताई खुशी-
फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के ज़ोनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि अस्पताल की क्लीनिकल एक्सीलेंस और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इससे फोर्टिस नोएडा की पहचान दुनिया के प्रमुख लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर के रूप में और मजबूत होगी।
नई उम्मीद की किरण-
यह सफलता सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों मरीजों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जिन्हें जटिल लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। आधुनिक तकनीक की मदद से अब ऐसे मरीजों का इलाज पहले से ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।