पेप्सिको इंडिया के पुणे प्लांट ने पूरे किए 25 साल, 600 करोड़ से ज्यादा का निवेश

पेप्सिको इंडिया के पुणे प्लांट ने संचालन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। 2001 में शुरू हुए इस प्लांट में कंपनी ने अब तक 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। यहां लेज़, कुरकुरे, चीटोस समेत कई लोकप्रिय स्नैक्स का उत्पादन होता है। प्लांट रोजगार, किसानों की साझेदारी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

पेप्सिको इंडिया के पुणे प्लांट ने पूरे किए 25 साल, 600 करोड़ से ज्यादा का निवेश

 पेप्सिको इंडिया की पुणे मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी ने अपने संचालन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। साल 2001 में शुरू हुआ यह प्लांट आज कंपनी के बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है। करीब 15 एकड़ में फैली इस फैसिलिटी में लेज़, कुरकुरे, चीटोस, सॉलिड मस्ती और अंकल चिप्स जैसे लोकप्रिय स्नैक्स बनाए जाते हैं। प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 62,100 टन है।

करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया-

पिछले 25 वर्षों में कंपनी ने इस प्लांट में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। कंपनी के मुताबिक, यह निवेश भारत में स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और ‘इन इंडिया, फॉर इंडिया’ सोच को मजबूत करने की दिशा में किया गया है। प्लांट से सीधे और अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 1,400 लोगों को रोजगार मिलता है।

पिछले 25 वर्षों से कंपनी की ग्रोथ जर्नी का अहम हिस्सा रहा-

इस मौके पर पेप्सिको इंडिया और दक्षिण एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने कहा कि पुणे प्लांट पिछले 25 वर्षों से कंपनी की ग्रोथ जर्नी का अहम हिस्सा रहा है। इस दौरान प्लांट की उत्पादन क्षमता करीब छह गुना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह प्लांट सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र नहीं, बल्कि इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी कई पहलों का भी हिस्सा रहा है।

किसानों के साथ मजबूत जुड़ाव-

पुणे प्लांट की कामयाबी में स्थानीय किसानों की भी अहम भूमिका है। पेप्सिको महाराष्ट्र के सैकड़ों किसानों के साथ मिलकर आलू की गुणवत्ता और पैदावार बेहतर करने पर काम करती है। इसके साथ ही किसानों को टिकाऊ खेती के तरीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।

100 प्रतिशत माइक्रो-इरिगेशन अपनाया-

कंपनी के मुताबिक, महाराष्ट्र और गुजरात समेत प्रमुख राज्यों में उसके पार्टनर आलू उत्पादक किसानों के खेतों में 100 प्रतिशत माइक्रो-इरिगेशन अपनाया गया है। इससे पानी की बचत के साथ खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने में मदद मिल रही है।

पर्यावरण बचाने पर भी फोकस-

पेप्सिको के pep+ कार्यक्रम के तहत पुणे प्लांट में ऊर्जा और पानी की बचत पर खास ध्यान दिया जा रहा है। प्लांट अपनी करीब 98.6 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करता है। इसके अलावा, यह लगातार छह वर्षों से जीरो लैंडफिल वेस्ट का दर्जा बनाए हुए है।

प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सुविधा-

नवंबर 2022 से प्लांट जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सुविधा के तौर पर भी काम कर रहा है। यानी प्लांट से निकलने वाले पानी को दोबारा इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है।

एक साल में बचाया 255 मिलियन लीटर पानी-

पानी बचाने के लिए प्लांट में ‘पोटैटो मॉइस्चर रिकवरी सिस्टम’ समेत कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इन पहलों की मदद से एक साल में करीब 255 मिलियन लीटर पानी की बचत हुई है। यह लगभग 1,300 घरों की एक साल की पानी की जरूरत के बराबर है।

हज़ारों लोगों को फायदा और ज्यादा जल पुनर्भरण को सक्षम बनाने में मदद-

इसके अलावा, पेप्सिको का SWRDM यानी Sustainable Water Resource Development and Management कार्यक्रम पुणे के छह गांवों में जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज पर काम कर रहा है। इस पहल से करीब 15,000 लोगों को फायदा मिल रहा है और इलाके में 100 प्रतिशत से ज्यादा जल पुनर्भरण को सक्षम बनाने में मदद मिली है।

25 साल की यात्रा में कई उपलब्धियां-

पुणे प्लांट के 25 साल पूरे होना पेप्सिको इंडिया के लिए एक अहम पड़ाव है। इन वर्षों में प्लांट ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार, किसानों के साथ साझेदारी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी काम किया है।

मजबूत साझेदारी पर कंपनी का फोकस-

कंपनी का कहना है कि पुणे प्लांट की यह यात्रा भारत में उसकी लंबे समय की प्रतिबद्धता को दिखाती है। आने वाले समय में भी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग, टिकाऊ उत्पादन और किसानों के साथ मजबूत साझेदारी पर कंपनी का फोकस जारी रहने की उम्मीद है।