कॉर्नियल ट्रांसप्लांट में बड़ा गैप, विशेषज्ञों ने बढ़ाई आई डोनेशन की अपील
भारत में हर साल करीब 1 लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन सिर्फ 25–30 हजार मरीजों को ही यह इलाज मिल पा रहा है। डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने डोनर कॉर्निया की कमी दूर करने के लिए ज्यादा आई डोनेशन, तेज रिट्रीवल और मजबूत आई-बैंक नेटवर्क की जरूरत पर जोर दिया।
भारत में हर साल करीब 1 लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 25–30 हजार ट्रांसप्लांट ही हो पा रहे हैं। यानी जरूरत के मुकाबले देश में केवल 25–30% मरीजों को ही यह इलाज मिल पा रहा है।
डॉक्टरों की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मेडिकल सुविधाएं-
डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के कॉर्निया विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अब कॉर्नियल सर्जरी के लिए डॉक्टरों की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं। असली समस्या सही समय पर पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी का डोनर कॉर्निया उपलब्ध न होना है।

जागरूक करना ही काफी नहीं-
41वें नेशनल आई डोनेशन फोर्टनाइट के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा कि सिर्फ लोगों को आंखें दान करने के लिए जागरूक करना ही काफी नहीं है। इसके साथ ही मौत के बाद समय पर आई बैंक को सूचना देना, तेजी से कॉर्निया रिट्रीव करना, उसकी जांच, सुरक्षित ट्रांसपोर्ट और जरूरतमंद मरीज तक उसे पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।
6 घंटे के अंदर रिट्रीवल क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार को जल्द से जल्द आई बैंक से संपर्क करना चाहिए। सही परिस्थितियों में कॉर्निया को आमतौर पर करीब 6 घंटे के भीतर रिट्रीव करने का लक्ष्य रखा जाता है। देरी होने पर कॉर्निया की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है और उसके ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल होने की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि डॉक्टरों का कहना है कि कई संभावित डोनर सिर्फ इसलिए खो जाते हैं क्योंकि परिवारों को समय पर आई बैंक से संपर्क करने की जानकारी नहीं होती।

49 हजार कॉर्निया रिट्रीव हुईं, लेकिन सिर्फ 27,394 ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त-
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत में 49 हजार से ज्यादा कॉर्निया रिट्रीव की गईं, लेकिन इनमें से करीब 27,394 कॉर्निया ही ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाई गईं। इससे साफ है कि चुनौती सिर्फ ज्यादा आंखें दान करवाने की नहीं है। डोनेट किए गए टिशू को सही समय पर रिट्रीव करना और उसका बेहतर इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है।
डॉ. तितियाल बोले- सिर्फ प्लेज लेने से काम नहीं चलेगा-
पद्म श्री प्रो. डॉ. जीवन तितियाल, रीजनल हेड–क्लिनिकल सर्विसेज, डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ने कहा कि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के कई मामलों में ट्रांसप्लांट के जरिए मरीज की रोशनी वापस लाने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए सही क्वालिटी का डोनर टिशू उपलब्ध होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब आई डोनेशन की अपील को सिर्फ प्लेज लेने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। परिवारों को यह समझाना जरूरी है कि मृत्यु के बाद समय पर लिया गया फैसला किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी ला सकता है। उन्होंने आई बैंक नेटवर्क को मजबूत करने, अस्पतालों में रिट्रीवल सिस्टम बेहतर करने और डोनर से लेकर मरीज तक पूरी प्रक्रिया में बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी जोर दिया।

नई तकनीकों से कॉर्नियल सर्जरी हुई ज्यादा टार्गेटेड-
कॉर्नियल ट्रांसप्लांट अब सिर्फ पूरी कॉर्निया बदलने तक सीमित नहीं है। आधुनिक तकनीकों की मदद से कई मामलों में कॉर्निया की सिर्फ उस लेयर को बदला जा सकता है, जो खराब हुई है।
नई तकनीकों से सही मरीजों को ज्यादा टार्गेटेड इलाज और विजुअल रिकवरी-
डॉ. प्रबजोत कौर, सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट, डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ने बताया कि नई तकनीकों से सही मरीजों को ज्यादा टार्गेटेड इलाज और तेजी से विजुअल रिकवरी मिल सकती है। हालांकि, इन आधुनिक सर्जरी का फायदा तभी मिल पाएगा जब जरूरत के समय अच्छी क्वालिटी का डोनर कॉर्निया उपलब्ध हो।
दिल्ली-NCR में 50 से ज्यादा केराटोप्लास्टी प्रोसीजर-
डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल ने दिल्ली-NCR में 50 से ज्यादा केराटोप्लास्टी प्रोसीजर पूरे किए हैं। इनमें कॉर्नियल इंफेक्शन या ट्रॉमा के बाद हुए स्कार, एडवांस्ड कॉर्नियल डिजीज, केराटोकोनस और कॉर्निया से जुड़ी दूसरी समस्याओं वाले मरीज शामिल रहे।
अवेयरनेस वॉकथॉन भी आयोजित-
आई डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए अस्पताल की ओर से अवेयरनेस वॉकथॉन भी आयोजित की गई। इसका मकसद लोगों को यह समझाना था कि आंखें दान करने का फैसला जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी है कि मृत्यु के बाद समय पर आई बैंक को सूचना दी जाए।

एक आंख का दान, किसी की जिंदगी में रोशनी-
डॉक्टरों का कहना है कि भारत में कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्ध डोनर टिशू के बीच बड़ा अंतर है। इस गैप को कम करने के लिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ मजबूत आई बैंक नेटवर्क, तेज रिट्रीवल सिस्टम और उपलब्ध कॉर्निया के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा।
आसान शब्दों में कहें तो एक परिवार का समय पर लिया गया फैसला किसी दूसरे इंसान की दुनिया को फिर से रोशन कर सकता है।