कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान ने वार्षिक कार्यशाला के माध्यम से ओडिशी नृत्य को दी नई ऊर्जा
कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान ने डॉ. अतासी मिश्रा के नेतृत्व में दिल्ली में तीन दिवसीय ओडिशी नृत्य कार्यशाला आयोजित की. गुरु ज्योति राउत के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने अभिनय, ताल, राग और नृत्य योगासन की बारीकियां सीखीं, जिससे भारतीय शास्त्रीय नृत्य विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा
कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान ने डॉ. अतासी मिश्रा के दूरदर्शी नेतृत्व में एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साकार किया. संस्थान द्वारा 24 से 26 अप्रैल 2026 तक कल्याणमयी एक्टिविटी सेंटर, INA कॉलोनी, दिल्ली में तीन दिवसीय गहन ओडिशी नृत्य कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया.
शैक्षणिक एवं व्यावहारिक आधार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित-
डॉ. अतासी मिश्रा द्वारा परिकल्पित एवं संरचित यह वार्षिक पहल युवा ओडिशी नृत्यांगनाओं के शैक्षणिक एवं व्यावहारिक आधार को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है. समग्र नृत्य शिक्षा पर केंद्रित इस कार्यशाला में देशभर से आए 20 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और इस प्राचीन नृत्य शैली की गहराई एवं अनुशासन को आत्मसात करने का अवसर प्राप्त किया.
ओडिशी की बारीकियों को गहराई से समझा-
कार्यशाला का संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओडिशी नृत्य गुरु, गुरु ज्योति राउत द्वारा किया गया. उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने ओडिशी की बारीकियों को गहराई से समझा. प्रशिक्षण सत्रों में ‘गंगा स्तुति’ के माध्यम से अभिनय, ताल एवं राग की संरचना, शारीरिक सुदृढ़ीकरण तथा बेहतर मुद्रा और संतुलन के लिए नृत्य योगासन पर विशेष ध्यान दिया गया.
तकनीकी दक्षता को निखारती आध्यात्मिक पक्ष से भी जोड़ती-
इस अवसर पर डॉ. अतासी मिश्रा ने आज के तीव्र गति वाले जीवन में निरंतर सीखने और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गहन कार्यशालाएं न केवल तकनीकी दक्षता को निखारती हैं, बल्कि कलाकारों को कला के आध्यात्मिक पक्ष से भी जोड़ती हैं और उन्हें इसकी सौंदर्यात्मक एवं दार्शनिक गहराइयों को समझने के लिए प्रेरित करती हैं.
सशक्त मंच के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान-
कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान ने वर्षों में सांस्कृतिक अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में एक सशक्त मंच के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. इस प्रकार की पहलों के माध्यम से संस्थान निरंतर युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर रहा है और प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में सार्थक अवसर प्रदान कर रहा है.
राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के संकल्प को सुदृढ़ किया-
संस्थान के उपाध्यक्ष मोहित माधव ने भी इस पहल में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हुए पारंपरिक कला रूपों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के संकल्प को और सुदृढ़ किया.
उत्साह एवं नई ऊर्जा के साथ समापन-
कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों के उत्साह एवं नई ऊर्जा के साथ हुआ, जो ओडिशी नृत्य की परंपरा को समृद्ध, प्रेरित और आगे बढ़ाने के लिए कला कल्प के सतत प्रयासों को दर्शाता है.