‘खेजड़ी’ ने दिल्ली में छोड़ी गहरी छाप! आखिरी सीन के बाद छाई खामोशी, आशीष शर्मा के अभिनय ने जीता दिल

राजस्थानी फिल्म ‘खेजड़ी’ की नई दिल्ली में खास स्क्रीनिंग हुई। पहचान, भेदभाव और सामाजिक स्वीकार्यता की कहानी ने दर्शकों को भावुक किया। आशीष शर्मा के अभिनय की जमकर तारीफ हुई।

नई दिल्ली में राजस्थानी फिल्म ‘खेजड़ी’ की खास स्क्रीनिंग शुक्रवार को ग्रेटर कैलाश स्थित BMVK ऑडिटोरियम में हुई। STAGE की ओर से आयोजित इस स्क्रीनिंग में फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया। फिल्म खत्म होने के बाद कई दर्शक भावुक नजर आए और कुछ देर तक ऑडिटोरियम में खामोशी छाई रही।

फिल्म की कहानी-

फिल्म की कहानी पहचान, भेदभाव, सम्मान और सामाजिक स्वीकार्यता जैसे गंभीर मुद्दों को सामने रखती है। यही वजह रही कि फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शक उसके बारे में चर्चा करते नजर आए।

विनीत कुमार समेत कई खास मेहमान पहुंचे-

स्क्रीनिंग में अभिनेता विनीत कुमार भी मौजूद रहे। उन्हें ‘शूल’, ‘मसान’, ‘महारानी’ और ‘भोला’ जैसी फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है। उनके अलावा STAGE के सह-संस्थापक और CEO विनय सिंघल, सह-संस्थापक परवीन सिंघल, शशांक वैष्णव और फिल्म से जुड़े कलाकार व क्रिएटिव टीम के सदस्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

स्क्रीनिंग में ट्रांसजेंडर समुदाय के कई सदस्य पहुंचे-

स्क्रीनिंग में बसेरा सामाजिक संस्थान की रामकली भी ट्रांसजेंडर समुदाय के कई सदस्यों के साथ पहुंचीं। उनके लिए यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं थी, बल्कि पहचान, सम्मान और समाज में स्वीकार किए जाने से जुड़े उन सवालों को सामने लाती है, जिनका सामना समुदाय के कई लोग अपनी जिंदगी में करते हैं। फिल्म के आखिरी दृश्य के बाद रामकली समेत कई दर्शक भावुक दिखाई दिए। इसके बाद वहां मौजूद लोगों के बीच फिल्म के विषय और उसके सामाजिक असर को लेकर चर्चा भी हुई।

आखिर क्या है ‘खेजड़ी’ की कहानी?

‘खेजड़ी’ की कहानी किरण सिंह की लघुकथा ‘सांझा’ से प्रेरित है। फिल्म एक ऐसे ट्रांसजेंडर व्यक्ति की कहानी बताती है, जिसे उसका पिता समाज के डर और भेदभाव से बचाने के लिए दुनिया से छिपाकर रखता है। लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब उसकी पहचान सामने आ जाती है। इसके बाद उसे ऐसे समाज का सामना करना पड़ता है, जो उसकी पहचान को आसानी से स्वीकार नहीं करता। फिल्म इसी संघर्ष के जरिए सवाल उठाती है कि किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण सम्मान और अपनापन पाने से क्यों रोका जाए?

फिल्म को खास बनाती-

फिल्म की खास बात यह है कि इसमें ट्रांसजेंडर किरदार को सिर्फ समाज की नजर से नहीं दिखाया गया है। कहानी उसके अनुभवों, भावनाओं और अंदर चल रहे संघर्ष पर भी ध्यान देती है। यही वजह है कि दर्शक किरदार के दर्द और उसकी स्थिति से जुड़ने लगते हैं।

आशीष शर्मा ने निभाया चुनौतीपूर्ण किरदार-

फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेता आशीष शर्मा ने निभाई है। ‘सिया के राम’, ‘रंगरसिया’ और ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके आशीष ने ‘खेजड़ी’ में बिल्कुल अलग तरह का किरदार निभाया है। इस भूमिका के लिए उन्होंने काफी तैयारी की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, किरदार में पूरी तरह ढलने के लिए उन्होंने अपना वजन करीब 20 किलो तक कम किया था। साथ ही किरदार की मानसिक स्थिति को समझने के लिए भी उन्होंने काफी मेहनत की।

कई पुरस्कार प्राप्त-

फिल्म के अंतरराष्ट्रीय सफर के दौरान भी आशीष शर्मा के अभिनय को सराहना मिली। उन्हें NYC South Asian Film Festival 2019 में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला था। फिल्म ने राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी कई पुरस्कार अपने नाम किए।

विनीत कुमार ने की आशीष के अभिनय की तारीफ-

स्क्रीनिंग के दौरान अभिनेता विनीत कुमार ने आशीष शर्मा के अभिनय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ‘खेजड़ी’ जैसी फिल्में उन कहानियों को सामने लाती हैं, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के सिनेमा में ज्यादा जगह नहीं मिलती। उनके मुताबिक, एक अभिनेता का काम सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं है, बल्कि ऐसी कहानियों और किरदारों को भी आवाज देना है, जिन्हें समाज में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।

ऐसी कहानियों को ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी-

STAGE के सह-संस्थापक और CEO विनय सिंघल ने कहा कि ‘खेजड़ी’ ऐसी कहानी है, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। उन्होंने कहा कि भारत की अलग-अलग भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों में ऐसी बहुत सी शानदार कहानियां हैं, जिन्हें बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है।

नजरिया बदलने का मौका-

वहीं, STAGE की सह-संस्थापक परवीन सिंघल ने कहा कि ‘खेजड़ी’ सिर्फ किसी एक समुदाय की कहानी नहीं है। यह समाज को अपनी सोच और दूसरे व्यक्ति की गरिमा को देखने का नजरिया बदलने का मौका देती है।

अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाए जाने की जानकारी-

‘खेजड़ी’ का सफर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा है। फिल्म को 20 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर KASHISH Mumbai International Queer Film Festival में हुआ था। इसके बाद फिल्म ने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बाद में इसे STAGE प्लेटफॉर्म पर भी दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया गया।

मनोरंजन के साथ बड़ा सामाजिक सवाल छोड़ जाती है ‘खेजड़ी’-

STAGE इससे पहले ‘सांवरी’, ‘नाते’ और ‘सांकळ’ जैसी कहानियों को भी दर्शकों तक पहुंचा चुका है। इन कहानियों में महिलाओं, ट्रांसजेंडर समुदाय, बाल विवाह, सामाजिक दबाव और जबरन निभाई जाने वाली परंपराओं जैसे मुद्दों को उठाया गया है। ‘खेजड़ी’ की दिल्ली स्क्रीनिंग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि क्या सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम है या फिर वह समाज को सोचने और बातचीत करने का मौका भी दे सकता है?

दर्शकों की भावुक प्रतिक्रिया-

फिल्म देखने के बाद दर्शकों की भावुक प्रतिक्रिया से साफ था कि ‘खेजड़ी’ ने उनके दिल और दिमाग दोनों पर असर छोड़ा। फिल्म आखिर में यही सवाल छोड़ जाती है—क्या किसी इंसान की पहचान उसके इंसान होने से बड़ी हो सकती है? और क्या समाज हर व्यक्ति को उसकी पहचान से परे एक इंसान के तौर पर स्वीकार करने के लिए तैयार है?