स्वतंत्रता दिवस पर सोनी सब के सितारों ने बताया आजादी का असली मतलब, बोले- जिम्मेदारी निभाना भी है देशभक्ति
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोनी सब के कलाकारों ने आजादी, देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर अपने विचार साझा किए। मनीष वाधवा, गुलकी जोशी, तोरल रसपुत्रा, करुणा पांडे, इक़बाल खान और समृद्ध बावा ने बताया कि उनके लिए सच्ची आजादी का क्या मतलब है।
स्वतंत्रता दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और उत्साह का दिन है। यह दिन हमें उन लोगों के बलिदान की याद दिलाता है, जिनकी वजह से आज हम आजादी की जिंदगी जी पा रहे हैं। लेकिन आजादी सिर्फ अपने मन की जिंदगी जीने का नाम नहीं है, इसके साथ अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
आजादी का क्या मतलब-
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोनी सब के कलाकारों मनीष वाधवा, गुलकी जोशी, तोरल रसपुत्रा, करुणा पांडे, इक़बाल खान और समृद्ध बावा ने बताया कि उनके लिए आजादी का क्या मतलब है और एक नागरिक के तौर पर देश को मजबूत बनाने में हम अपना योगदान कैसे दे सकते हैं।
इक़बाल खान: रोजमर्रा के कामों से दिखता है देशप्रेम-
‘यादें’ में डॉक्टर देव मेहता का किरदार निभा रहे इक़बाल खान का मानना है कि देश से प्यार सिर्फ बड़ी-बड़ी बातों तक सीमित नहीं होना चाहिए। अपने आसपास सफाई रखना, सभी के साथ बराबरी और प्यार से पेश आना और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करना भी देशभक्ति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, एक जिम्मेदार नागरिक बनकर और अपनी तरफ से छोटे-छोटे अच्छे काम करके भी देश को बेहतर बनाया जा सकता है।

तोरल रसपुत्रा: हर महिला को मिले अपनी जिंदगी चुनने की आजादी-
‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा के लिए आजादी का मतलब है आत्मविश्वास के साथ अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना और अपने मूल्यों से जुड़े रहना।उनका कहना है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन असली आजादी तब होगी जब हर महिला खुद को सुरक्षित, सम्मानित और अपने फैसले लेने के लिए पूरी तरह सक्षम महसूस करे।

मनीष वाधवा: देशभक्ति जिम्मेदारी निभाने का नाम है-
‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा के लिए स्वतंत्रता दिवस बेहद भावुक कर देने वाला अवसर है। उनका कहना है कि यह दिन उन अनगिनत लोगों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। इतिहास और संस्कृति से जुड़े किरदार निभाने वाले मनीष का मानना है कि तिरंगा देखकर और राष्ट्रगान सुनकर आज भी उनके अंदर गर्व की भावना पैदा होती है। उनके मुताबिक, एक-दूसरे का सम्मान करना, अपने मूल्यों को बनाए रखना और देश के लिए अपनी तरफ से योगदान देना ही सच्ची देशभक्ति है।

करुणा पांडे: आजादी का जश्न जिम्मेदारी और दयालुता से-
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में पुष्पा का किरदार निभा रहीं करुणा पांडे ने बताया कि ध्वजारोहण और राष्ट्रगान सुनना उनके लिए हमेशा खास रहा है। उनका कहना है कि वह खुद को खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें ऐसे देश में रहने का मौका मिला, जहां वह अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं और खुलकर अपनी बात रख सकती हैं।करुणा के लिए आजादी का जश्न मनाने का सबसे अच्छा तरीका है दूसरों के प्रति दयालु रहना, अपनी जिम्मेदारियां निभाना और जहां संभव हो, समाज और देश के लिए योगदान देना।

गुलकी जोशी: अपनी आवाज के साथ दूसरों को भी बोलने की जगह दें-
‘यादें’ में डॉक्टर सृष्टि अग्रवाल की भूमिका निभा रहीं गुलकी जोशी का मानना है कि आजादी सिर्फ अपनी बात कहने की आजादी नहीं है। जरूरी यह भी है कि हम दूसरों को अपनी बात रखने और अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका दें। एक कलाकार के तौर पर अलग-अलग किरदार और भावनाएं निभाने वाली गुलकी के लिए अभिव्यक्ति की आजादी बेहद खास है। उनका मानना है कि जब हम दूसरों के विचारों का सम्मान करते हैं और उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, तभी आजादी की असली भावना मजबूत होती है।

समृद्ध बावा: आजादी के साथ जिम्मेदारी भी आती है-
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में अश्विन का किरदार निभा रहे समृद्ध बावा ने अपने बचपन के स्वतंत्रता दिवस की यादें साझा कीं। उनके लिए उस समय यह दिन सफेद कपड़े पहनने, छोटे-छोटे तिरंगे लहराने और दोस्तों के साथ देशभक्ति के गीत गाने का मौका हुआ करता था। आज उनके लिए आजादी का मतलब इससे कहीं बड़ा है। वह मानते हैं कि हमें अपने सपने देखने, अपनी बात कहने और अपना भविष्य बनाने का अधिकार इसलिए मिला है क्योंकि पिछली पीढ़ियों ने इसके लिए बहुत बलिदान दिए हैं। समृद्ध के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी अलग-अलग संस्कृतियों, परंपराओं और विचारों में एक साथ खड़े रहने की क्षमता है। यही विविधता भारत की असली पहचान है।

सोनी सब के कलाकारों का संदेश साफ-
स्वतंत्रता दिवस पर सोनी सब के कलाकारों का संदेश साफ है—आजादी का जश्न मनाने के साथ हमें अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। छोटे-छोटे अच्छे काम, एक-दूसरे का सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना ही भारत को हर दिन और मजबूत बना सकती है।
सोनी सब पर ‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ देखते रहिए।