‘नेबर्स विद नेचर’ से बदलेगा शहरी इकोसिस्टम: Godrej Properties Limited की पहल

Godrej Properties Limited ने ‘नेबर्स विद नेचर’ पहल के जरिए शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जल पुनर्भरण और जैव विविधता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. यह पहल स्थानीय स्तर पर हरित विकास को बढ़ावा देकर लोगों के जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने पर केंद्रित है.

‘नेबर्स विद नेचर’ से बदलेगा शहरी इकोसिस्टम: Godrej Properties Limited की पहल

भारत की अग्रणी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड (जीपीएल) ने आज ‘नेबर्स विद नेचर’ नामक एक दीर्घकालिक पहल की घोषणा की. यह स्थानीय स्तर पर पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और पड़ोस के समग्र कल्याण पर केंद्रित है. इस पहल के तहत कंपनी अपने सभी पर्यावरणीय प्रयासों को एक पहचान के साथ आगे बढ़ाएगी, जिससे उसके प्रोजेक्ट्स के आसपास के क्षेत्रों में ठोस और दिखने वाला पर्यावरणीय प्रभाव उत्पन्न हो सके.

‘नेबर्स विद नेचर’ के माध्यम से इन प्रयासों को विस्तार-

यह पहल जीपीएल की पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। पिछले दो वर्षों में कंपनी ने 96,000 टन से अधिक कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका है, 1.7 करोड़ लीटर से अधिक वॉटर रिचार्ज को संभव बनाया है और पिछले पांच वर्षों में 4 लाख से अधिक पेड़ लगाए हैं. ‘नेबर्स विद नेचर’ के माध्यम से इन प्रयासों को माइक्रो मार्केट्स तक विस्तार दिया जाएगा, जिसमें प्रकृति संरक्षण, जल प्रणाली सुधार, जैव विविधता बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर होगा.

चक्करपुर–वजीराबाद बंध के पुनर्स्थापन में सहयोग किया-

इस पहल के पहले चरण में जीपीएल ने ‘आई एम गुरुग्राम’ के साथ मिलकर चक्करपुर–वजीराबाद बंध के पुनर्स्थापन में सहयोग किया है 5.2 किलोमीटर लंबा यह पारिस्थितिक कॉरिडोर, जो कभी उपेक्षित नाला था, अब देशी पेड़ों और झाड़ियों के रोपण, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट के पुन: उपयोग, पैदल और साइकिल पथों के निर्माण, सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था तथा वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने जैसे प्रयासों से एक हरित और जीवंत क्षेत्र में बदल गया है.

दिया मिर्ज़ा: शहरों में भी प्रकृति का संतुलित अस्तित्व संभव-

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण की सद्भावना दूत दीया मिर्जा ने इस पहल से जुड़कर शहरों में पारिस्थितिक संपत्तियों के संरक्षण की आवश्यकता को उजागर किया. उन्होंने कहा, “शहरीकरण ने हमें प्राकृतिक प्रणालियों से दूर कर दिया है, जिन पर हमारी निर्भरता है. गोदरेज प्रॉपर्टीज की ‘नेबर्स विद नेचर’ पहल यह याद दिलाती है कि यदि हम संरक्षण और पोषण का संकल्प लें, तो शहरों में भी प्रकृति का संतुलित अस्तित्व संभव है. आज लग्जरी का सही अर्थ अतिरेक नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ संतुलन बनाना है.”

हरित क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि को प्रभावित करते हैं-

गोदरेज प्रॉपर्टीज की उत्तर क्षेत्र की मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीतिका त्रेहन ने कहा, “हमारे शहरों में लोगों का जीवन स्तर केवल उनके घरों से नहीं, बल्कि उनके आसपास के पर्यावरण से भी निर्धारित होता है. स्वच्छ हवा, छायादार रास्ते और हरित क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि को प्रभावित करते हैं. हमारा उद्देश्य इन पारिस्थितिक तंत्रों में निवेश कर लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है.”

जीवन में स्थिरता और प्रकृति को सहज रूप से शामिल करने का प्रयास-

कंपनी के मुख्य मार्केटिंग एवं वाणिज्यिक अधिकारी ललित मखीजानी ने कहा, “लोग तब किसी स्थान से जुड़ाव महसूस करते हैं, जब वह उन्हें शांति, स्वास्थ्य और प्रकृति के करीब होने का अनुभव कराता है. यह पहल रोजमर्रा के जीवन में स्थिरता और प्रकृति को सहज रूप से शामिल करने का प्रयास है.”

साझेदारी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण-

‘आई एम गुरुग्राम’ के प्रवक्ता ने कहा कि यह साझेदारी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो देशी पौधों के रोपण, जल पुनर्भरण क्षेत्रों के विकास और हरित, पैदल चलने योग्य स्थानों के निर्माण के माध्यम से शहर के पारिस्थितिक ढांचे को मजबूत कर रही है.

‘फॉरेस्ट बाथिंग’ (शिनरिन-योकू) वॉक का आयोजन-

इस पहल की शुरुआत पर गोदरेज प्रॉपर्टीज ने गोदरेज मिराया में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसके बाद पुनर्स्थापन बंध क्षेत्र में ‘फॉरेस्ट बाथिंग’ (शिनरिन-योकू) वॉक का आयोजन किया गया गोदरेज मिराया को आईजीबीसी नेट जीरो वेस्ट प्लेटिनम सर्टिफिकेशन (डिजाइन चरण) प्राप्त है और इसमें आसपास के जल स्रोत के पुनर्जीवन के प्रयास भी शामिल हैं, जो जैव विविधता और सूक्ष्म जलवायु को बेहतर बनाने में सहायक हैं.

‘गुड एंड ग्रीन’ विचारधारा से प्रेरित ‘नेबर्स विद नेचर’ पहल-

गोदरेज समूह की ‘गुड एंड ग्रीन’ विचारधारा से प्रेरित ‘नेबर्स विद नेचर’ पहल भविष्य में देशभर के शहरी क्षेत्रों में हरित सार्वजनिक स्थानों, जैव विविधता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने का आधार बनेगी.