माँ बनने की यात्रा और महाभारत की सीख, अभिनेत्रियों ने बताई दिल की बात

शॉर्ट: महाभारत की सीख आज भी पैरेंटिंग में प्रासंगिक है. दिव्यांका त्रिपाठी, जूही परमार और श्रद्धा आर्या ने बताया कि कुंती, गांधारी और द्रोणाचार्य जैसे किरदार बच्चों की परवरिश, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से फैसले लेने की प्रेरणा देते हैं. यही संदेश सोनी सब के नए शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ में देखने को मिलेगा.

माँ बनने की यात्रा और महाभारत की सीख, अभिनेत्रियों ने बताई दिल की बात

आज के समय में पैरेंटिंग आसान नहीं है. बच्चों की तुलना, लोगों की राय और हर फैसले को सही साबित करने का दबाव लगभग हर माता-पिता महसूस करते हैं. ऐसे में कुछ कहानियाँ हमें सही रास्ता दिखाती हैं और महाभारत उन्हीं में से एक है.

महाभारत की ऐसी ही सीखों को नए अंदाज़ में-

सोनी सब के नए पौराणिक शो ‘हस्तिनापुर के वीर’ के जरिए महाभारत की ऐसी ही सीखों को नए अंदाज़ में दर्शकों तक पहुंचाया जा रहा है. हाल ही में टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्रियाँ दिव्यांका त्रिपाठी, जूही परमार और श्रद्धा आर्या ने बताया कि महाभारत के किरदारों से उन्होंने पैरेंटिंग और मातृत्व को लेकर क्या सीखा.

दिव्यांका त्रिपाठी: अच्छी पैरेंटिंग की असली निशानी-

दिव्यांका त्रिपाठी का मानना है कि आज बच्चों की तुलना बहुत जल्दी शुरू हो जाती है. उन्होंने कहा कि कुंती की तरह हर बच्चे की अलग पहचान और खासियत को समझना ही अच्छी पैरेंटिंग की असली निशानी है.जब बच्चों को उनकी खूबियों के अनुसार आगे बढ़ाया जाए, तो तुलना की जगह प्यार और विश्वास ले लेता है.

जूही परमार: आज के डिजिटल दौर में बच्चों के साथ दोस्ती जरूरी-

वहीं जूही परमार ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों के साथ दोस्ती जरूरी है, लेकिन सिर्फ दोस्त बनना ही काफी नहीं. माता-पिता को बच्चों की दुनिया को समझना और हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करना भी जरूरी है. उन्होंने महाभारत की गांधारी का उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों की कमियों और चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

श्रद्धा आर्या: अपने दिल की आवाज़ पर भरोसा करना चाहिए-

श्रद्धा आर्या ने नई मांओं को मिलने वाली अनगिनत सलाहों पर बात करते हुए कहा कि कभी-कभी इतने सुझाव मिलते हैं कि सही फैसला लेना मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में गुरु द्रोणाचार्य और अर्जुन की कहानी याद आती है, जो सिखाती है कि लक्ष्य पर फोकस रखना कितना जरूरी है. उनके अनुसार, मां को अपने दिल की आवाज़ पर भरोसा करना चाहिए क्योंकि वही सबसे भरोसेमंद मार्गदर्शक होती है.

दिल को छू लेने वाला अंदाज़-

महाभारत की ये सीखें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं. ‘हस्तिनापुर के वीर’ इन्हीं मूल्यों और भावनाओं को दर्शकों के सामने एक नए और दिल को छू लेने वाले अंदाज़ में देखिए 2 जून से, सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर.