कृष्ण की कहानी तो आपने सुनी होगी, लेकिन राधा की नजरों से पहली बार देखिए ‘KRISHNAGRI’
दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में ‘KRISHNAGRI – एक प्रेम कथा’ का मंचन हुआ, जिसमें राधा की नजरों से कृष्ण के जीवन, प्रेम, भक्ति और विरह की कहानी को कथक, संगीत, अभिनय और आधुनिक मंच तकनीक के जरिए प्रस्तुत किया गया।
दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में राधा-कृष्ण के प्रेम, विरह और भक्ति पर आधारित कथक नृत्य-नाट्य प्रस्तुति “KRISHNAGRI - एक प्रेम कथा” का मंचन किया गया। करीब 75 मिनट की इस प्रस्तुति में कृष्ण की कहानी को राधा के नजरिए से दिखाने की कोशिश की गई।
राधा-कृष्ण का प्रेम और रासलीला जैसे प्रसंग शामिल-
प्रस्तुति में कृष्ण जन्म से लेकर गोकुल और वृंदावन के बचपन तक की कहानी दिखाई गई। इसमें यशोदा का वात्सल्य, माखन चोरी, ब्रह्मांड दर्शन, कालिया प्रसंग, गोवर्धन, राधा-कृष्ण का प्रेम और रासलीला जैसे प्रसंग शामिल रहे।

राधा की नजरों से कृष्ण की कहानी-
“KRISHNAGRI” का मुख्य सवाल रहा—“क्या आपने कभी कृष्ण को राधा की आँखों से देखा है?” इसी विचार के आसपास पूरी कहानी बुनी गई। इसमें राधा के कृष्ण के प्रति प्रेम, उनसे जुड़ी यादों और कृष्ण के वृंदावन छोड़कर जाने के बाद उनके इंतजार और विरह को प्रमुखता दी गई।

रिश्तों और भावनाओं पर भी ध्यान दिया गया-
प्रस्तुति में कृष्ण को सिर्फ एक दिव्य पात्र के तौर पर दिखाने के बजाय उनके आसपास मौजूद रिश्तों और भावनाओं पर भी ध्यान दिया गया। प्रेम, भक्ति, याद और दूरी जैसे भाव कहानी के अहम हिस्से रहे।
कथक के साथ लोक नृत्य और छाऊ का मेल-
“KRISHNAGRI” में कथक मुख्य नृत्य शैली रही। इसके साथ लोक नृत्य और छाऊ के तत्वों को भी शामिल किया गया। नृत्य और अभिनय के साथ संगीत, रोशनी और बड़े एलईडी विजुअल्स का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए गोकुल, वृंदावन, यमुना और कृष्ण की यात्रा से जुड़े दृश्य मंच पर दिखाए गए।
पारंपरिक नृत्य शैली के साथ आधुनिक मंच तकनीक-
मंच पर मोरपंख, बांसुरी, घुंघरू और ब्रज से जुड़े दूसरे दृश्यात्मक तत्वों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया। पारंपरिक नृत्य शैली के साथ आधुनिक मंच तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तुति को अलग रूप देता नजर आया।

कृष्ण के जाने के बाद राधा का विरह-
प्रस्तुति का एक अहम हिस्सा कृष्ण के वृंदावन से चले जाने के बाद राधा की भावनात्मक यात्रा पर रहा। कहानी में यह दिखाया गया कि किसी अपने से दूरी होने के बावजूद उसकी यादें और उससे जुड़ी भावनाएं मन में बनी रह सकती हैं। राधा के इंतजार और कृष्ण की यादों के जरिए प्रेम के उस पहलू को सामने रखा गया, जहां शारीरिक दूरी के बावजूद किसी प्रिय की मौजूदगी महसूस होती रहती है।

कौन-कौन रहा प्रस्तुति का हिस्सा?
“KRISHNAGRI – एक प्रेम कथा” की लेखिका और संकल्पनाकार रिचा गुप्ता हैं, जबकि इसका निर्माण रूपा गुप्ता ने किया। संगीत पं. ज्वाला प्रसाद का और नृत्य निर्देशन स्वप्ना मजूमदार का रहा। प्रमुख कलाकारों में स्वप्ना मजूमदार ने कृष्ण, रिचा गुप्ता ने राधा, फाल्गुनी ने यशोदा, अनुषुआ चौधरी ने कृष्ण, नायरा ने बाल कृष्ण और थॉमसन ने नंद बाबा की भूमिका निभाई। कथक ठुमरी में रिचा गुप्ता और मनोज गंगानी का योगदान रहा। प्रकाश परिकल्पना मिलिंद श्रीवास्तव ने की, जबकि ऑडियो-विजुअल और क्रिएटिव बैकग्राउंड विजुअल दीपांजलि गेरा ने तैयार किए। गायन और संगीत स्वर में सुरेश वाडेकर, कविता कृष्णमूर्ति, पं. ज्वाला प्रसाद, गुरु घनश्याम गंगानी और रूपा गुप्ता ने योगदान दिया।

परंपरा के साथ आधुनिक मंच-
“KRISHNAGRI” में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा को आधुनिक मंच तकनीक के साथ जोड़ा गया। एलईडी स्क्रीन, प्रकाश व्यवस्था, संगीत और अभिनय के जरिए कहानी के अलग-अलग भावों को मंच पर दिखाया गया। निर्माता टीम के मुताबिक, प्रस्तुति का मकसद राधा-कृष्ण की जानी-पहचानी कहानी को राधा की भावनाओं और अनुभवों के जरिए एक अलग मंचीय रूप में पेश करना था।

राधा का प्रेम, इंतजार, याद और विरह-
कुल मिलाकर, “KRISHNAGRI – एक प्रेम कथा” ने कृष्ण की कहानी के साथ राधा के प्रेम, इंतजार, याद और विरह को केंद्र में रखा। प्रस्तुति में यही भाव उभरकर आया कि किसी प्रिय व्यक्ति की दूरी के बावजूद उसकी यादें और भावनाएं मन में बनी रह सकती हैं।