26 साल के मर्चेंट नेवी ऑफिसर के दिल में था बड़ा छेद, Fortis Escorts में रोबोटिक सर्जरी से हुआ सफल इलाज
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के डॉक्टरों ने 26 साल के मर्चेंट नेवी ऑफिसर के दिल में मौजूद बड़े जन्मजात छेद (ASD) का रोबोटिक-एसिस्टेड मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से सफल इलाज किया। इस तकनीक से बिना ब्रेस्टबोन खोले सर्जरी की गई और मरीज को जल्द रिकवरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के डॉक्टरों ने 26 साल के एक मर्चेंट नेवी ऑफिसर के दिल में मौजूद जन्मजात छेद का रोबोटिक सर्जरी के जरिए सफल इलाज किया है। इस इलाज के बाद मरीज को अपने मर्चेंट नेवी के करियर को आगे बढ़ाने की नई उम्मीद मिली है।
पूरी प्रक्रिया में कार्डियोलॉजी की टीम शामिल-
इस पूरी प्रक्रिया को फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी के सीनियर डायरेक्टर डॉ. ऋत्विक राज भुयान के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने किया। इस दौरान डॉ. निशीथ चंद्रा, प्रिंसिपल डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी की टीम भी शामिल रही।

रूटीन चेकअप में सामने आई दिल की समस्या-
26 वर्षीय युवक मर्चेंट नेवी में काम करते हैं। नौकरी से जुड़े रूटीन हेल्थ चेकअप के दौरान उनके दिल में मौजूद जन्मजात बीमारी का पता चला। पहले की मेडिकल स्क्रीनिंग में ECG के दौरान यह समस्या सामने नहीं आई थी। बाद में एक रूटीन जांच के दौरान किए गए इकोकार्डियोग्राम में उनके दिल में बड़ा एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) पाया गया। ASD दिल के दोनों ऊपरी हिस्सों के बीच की दीवार में मौजूद जन्मजात छेद होता है। इसकी वजह से फेफड़ों तक जरूरत से ज्यादा खून पहुंच सकता है और दिल के दाहिने हिस्से पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।समस्या सामने आने के बाद मरीज को मर्चेंट नेवी की सर्विस के लिए फिट नहीं माना गया। इससे उनके करियर और अपने सपने को लेकर चिंता बढ़ गई।

डिवाइस से बंद नहीं हो सकता था छेद-
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला में जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि दिल में मौजूद छेद काफी बड़ा था और उसकी बनावट ऐसी थी कि उसे सामान्य कैथेटर-आधारित डिवाइस से बंद करना संभव नहीं था। ऐसे मामलों में आमतौर पर ओपन-हार्ट सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन मरीज की कम उम्र, अच्छी सेहत और जल्द अपने काम पर लौटने की जरूरत को देखते हुए डॉक्टरों ने रोबोटिक-एसिस्टेड मिनिमली इनवेसिव सर्जरी का विकल्प चुना।
बिना ब्रेस्टबोन खोले की गई सर्जरी-
डॉक्टरों ने da Vinci Xi रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की मदद से यह सर्जरी की। इस तकनीक में छोटे पोर्ट के जरिए दिल तक पहुंच बनाई गई और पारंपरिक तरीके की तरह ब्रेस्टबोन को खोलने की जरूरत नहीं पड़ी। डॉक्टरों ने एक विशेष पैच की मदद से दिल में मौजूद छेद को बंद किया। अस्पताल के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और इसमें कोई बड़ी जटिलता नहीं हुई। मरीज को उसी दिन वेंटिलेटर से हटा दिया गया। इसके बाद उनकी रिकवरी सामान्य रही और उन्हें स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल के अनुसार, उस समय उनके दिल की कार्यप्रणाली सामान्य थी।

‘मर्चेंट नेवी में करियर जारी रखने की उम्मीद मिली’-
इलाज के बाद मरीज ने डॉक्टरों और पूरी मेडिकल टीम का आभार जताया। उन्होंने बताया कि जन्म से इस समस्या के बावजूद उन्हें पहले कभी कोई बड़ी परेशानी महसूस नहीं हुई थी और वह हमेशा एक्टिव रहे। मरीज के मुताबिक, जब उन्हें दिल में जन्मजात विकार के बारे में पता चला और मर्चेंट नेवी में काम करने पर इसका असर पड़ा, तो यह उनके लिए काफी परेशान करने वाला समय था। रोबोटिक सर्जरी के सफल होने के बाद उन्हें अपने करियर को आगे बढ़ाने की नई उम्मीद मिली।

डॉक्टर ने क्या कहा?
डॉ. ऋत्विक राज भुयान ने बताया कि ASD कोई बहुत असामान्य बीमारी नहीं है, लेकिन इस मरीज के दिल में छेद काफी बड़ा था। ऐसे में अगर इसका इलाज नहीं किया जाता तो आगे चलकर इसके गंभीर असर हो सकते थे। उन्होंने कहा कि छेद बड़ा होने के कारण इसे डिवाइस से बंद करना संभव नहीं था। इसलिए रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुना गया। इस तकनीक से पारंपरिक ओपन सर्जरी से बचते हुए मरीज का इलाज किया गया और रिकवरी भी जल्दी होने में मदद मिली।

रोबोटिक-एसिस्टेड सर्जरी का फैसला-
वहीं डॉ. निशीथ चंद्रा ने बताया कि कई ASD मामलों में ग्रोइन की नसों के रास्ते कैथेटर डालकर डिवाइस की मदद से छेद बंद किया जा सकता है। लेकिन इस मरीज में छेद का आकार और उसकी बनावट अलग होने के कारण यह तरीका संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि मरीज की उम्र, सेहत और जल्द अपने प्रोफेशन में लौटने की जरूरत को देखते हुए रोबोटिक-एसिस्टेड सर्जरी का फैसला लिया गया।

मिनिमली इनवेसिव इलाज पर जोर-
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के रीजनल डायरेक्टर डॉ. विक्रम अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में आधुनिक तकनीक और डॉक्टरों की विशेषज्ञता के जरिए मरीजों को कम चीरे वाली सर्जरी के विकल्प देने पर जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले ने दिखाया कि रोबोटिक-एसिस्टेड कार्डियक सर्जरी किस तरह युवा मरीजों को जल्दी रिकवरी में मदद कर सकती है, खासकर जब मरीज को जल्द अपनी सामान्य और प्रोफेशनल जिंदगी में वापस लौटना हो।

पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी से बचाते हुए उपचार-
यह मामला आधुनिक रोबोटिक तकनीक के जरिए जटिल जन्मजात हृदय विकार के इलाज का एक उदाहरण है, जिसमें मरीज को पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी से बचाते हुए उपचार किया गया।