वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स की पहल, फरीदाबाद में शुरू हुई एडवांस्ड ब्रेन ट्रीटमेंट यूनिट

वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद ने एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट शुरू की है। यहां RTMS तकनीक के जरिए बिना सर्जरी दिमाग के खास हिस्सों की गतिविधियों को प्रभावित कर न्यूरोलॉजिकल और कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार में मदद की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स की पहल, फरीदाबाद में शुरू हुई एडवांस्ड ब्रेन ट्रीटमेंट यूनिट

वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद ने मरीजों को आधुनिक इलाज की सुविधा देने के लिए एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत की है। इस नई यूनिट में रिपीटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (RTMS) जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी। इसकी खास बात यह है कि इसमें बिना सर्जरी के मैग्नेटिक पल्स की मदद से दिमाग के खास हिस्सों की गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है।

आधुनिक और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार-

इस यूनिट का उद्घाटन अस्पताल के फाउंडिंग मेंबर, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने किया। इस पहल का उद्देश्य न्यूरोलॉजी और कुछ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के मरीजों को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार उपलब्ध कराना है।

किन बीमारियों में मददगार हो सकती है RTMS तकनीक?

अस्पताल की नई यूनिट में स्ट्रोक के बाद हाथ-पैरों की मूवमेंट में परेशानी, मूवमेंट डिसऑर्डर, लंबे समय से होने वाला दर्द, माइग्रेन, कानों में लगातार आवाज आने की समस्या (टिनिटस), डिप्रेशन और ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी स्थितियों में RTMS तकनीक के इस्तेमाल का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा निकोटीन की लत छोड़ने में मदद के लिए भी इस तकनीक की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। हालांकि, हर मरीज के लिए यह उपचार उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है। मरीज की बीमारी, मेडिकल रिपोर्ट और जरूरतों को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर ही तय करेंगे कि उसे इस तकनीक से फायदा मिल सकता है या नहीं।

दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में कैसे काम करती है यह तकनीक?

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद की प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी, डॉ. सुषमा शर्मा ने बताया कि हमारे दिमाग में खुद को बदलने और नई परिस्थितियों के अनुसार काम करने की क्षमता होती है। इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं। उन्होंने बताया कि RTMS तकनीक में मैग्नेटिक पल्स के जरिए दिमाग के खास हिस्सों की गतिविधियों को प्रभावित किया जाता है। सही मरीजों का चयन करने के बाद इसे दूसरे उपचारों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

उपचार और लगातार डॉक्टरों की निगरानी जरूरी-

डॉ. सुषमा शर्मा के अनुसार, स्ट्रोक के बाद रिकवरी, पार्किंसनिज्म में मांसपेशियों की अकड़न, फाइब्रोमायल्जिया, लंबे समय से होने वाले न्यूरोलॉजिकल दर्द, डिप्रेशन और OCD जैसी समस्याओं में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं हैं। स्ट्रोक के बाद रिहैबिलिटेशन करा रहे मरीजों में यह तकनीक हाथ-पैरों की गतिविधियों में सुधार के लिए सहायक हो सकती है। हालांकि, इसके लिए मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार और लगातार डॉक्टरों की निगरानी जरूरी है।

फरीदाबाद और आसपास के मरीजों को मिलेगा फायदा-

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. (कर्नल) नवनीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर इस यूनिट की शुरुआत मरीजों तक आधुनिक मेडिकल सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का असर सिर्फ मरीज की सेहत पर ही नहीं, बल्कि उसकी रोजमर्रा की जिंदगी, आत्मनिर्भरता और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। नई यूनिट से अस्पताल की न्यूरोलॉजी सेवाओं को और मजबूती मिलेगी और मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि फरीदाबाद और आसपास के इलाकों के लोगों को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा अपने शहर में ही मिले, ताकि इलाज के लिए उन्हें दूसरे बड़े शहरों में न जाना पड़े।

आधुनिक न्यूरोलॉजी सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा-

नई एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत के साथ मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स ने अपनी न्यूरोसाइंसेज सेवाओं का विस्तार किया है। अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज, आधुनिक जांच, रिहैबिलिटेशन और नई तकनीकों के जरिए मरीजों को बेहतर न्यूरोलॉजिकल केयर देने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल से फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों में न्यूरोलॉजी से जुड़ी आधुनिक उपचार सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।