हड्डियों की कमजोरी को न करें नजरअंदाज, आकाश हेल्थकेयर ने समय पर जांच पर दिया जोर

आकाश हेल्थकेयर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि DEXA स्कैन कराने वाले 69.3% मरीजों में हड्डियों का घनत्व कम पाया गया। विशेषज्ञों ने समय पर जांच, सही खानपान और हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी है।

हड्डियों की कमजोरी को न करें नजरअंदाज, आकाश हेल्थकेयर ने समय पर जांच पर दिया जोर

हड्डियों की सेहत को अक्सर तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक हड्डियों में तेज दर्द न हो या फ्रैक्चर जैसी समस्या सामने न आ जाए। लेकिन आकाश हेल्थकेयर के एक नए विश्लेषण से पता चला है कि हड्डियों की जांच कराने वाले लोगों में बोन डेंसिटी यानी हड्डियों का घनत्व कम होने की समस्या काफी आम है। विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के मौके पर जारी इस विश्लेषण में बताया गया है कि जांच में शामिल करीब 69.3 प्रतिशत मरीजों में ऑस्टियोपेनिया या ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया।

स्कैन के रिकॉर्ड्स का विश्लेषण-

आकाश हेल्थकेयर ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच किए गए 1,246 DEXA स्कैन के रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया। DEXA स्कैन एक खास जांच है, जिससे हड्डियों में मौजूद मिनरल्स की मात्रा और उनकी मजबूती का पता लगाने में मदद मिलती है।

69.3% मरीजों में मिली हड्डियों के कम घनत्व की समस्या-

रिपोर्ट के मुताबिक, जांच कराने वाले 69.3 प्रतिशत मरीजों में हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम पाया गया। इनमें 38.3 प्रतिशत मरीजों को ऑस्टियोपेनिया और 31 प्रतिशत मरीजों को ऑस्टियोपोरोसिस था। ऑस्टियोपेनिया ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम होने लगता है। वहीं, ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

विश्लेषण में 25.7 प्रतिशत मरीजों की बोन डेंसिटी सामान्य पाई गई, जबकि 5.1 प्रतिशत मरीजों को हाई-BMD यानी अधिक बोन मिनरल डेंसिटी की श्रेणी में रखा गया।

ये आंकड़े बताते हैं कि हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना कितना जरूरी है। हालांकि, यह विश्लेषण केवल उन लोगों के रिकॉर्ड पर आधारित है, जिन्होंने DEXA स्कैन कराया था। इसलिए इन आंकड़ों को देश की पूरी आबादी में ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति का सही अनुमान नहीं माना जा सकता।

55 से 84 साल के लोगों में ज्यादा देखने को मिली समस्या-

उम्र के हिसाब से किए गए विश्लेषण में सामने आया कि 55 से 84 साल की उम्र के करीब 72 से 73 प्रतिशत मरीजों में ऑस्टियोपेनिया या ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने का खतरा बढ़ सकता है। लेकिन रिपोर्ट में कम उम्र के कुछ मरीजों में भी हड्डियों का घनत्व कम पाया गया।

कम उम्र के लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत-

इससे साफ होता है कि हड्डियों की सेहत को लेकर केवल बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि कम उम्र के लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। सही समय पर जांच कराने से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का पता लगाने और जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

विटामिन D की कमी भी बनी चिंता का विषय-

हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में विटामिन D, कैल्शियम और पैराथाइरॉइड हार्मोन (PTH) की अहम भूमिका होती है। शरीर में इनका असंतुलन हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।आकाश हेल्थकेयर के विश्लेषण में विटामिन D के नतीजे उपलब्ध 544 मरीजों में से 56.1 प्रतिशत में इसका स्तर कम या अपर्याप्त पाया गया। वहीं, PTH की जांच के नतीजे उपलब्ध 146 मरीजों में से 31.5 प्रतिशत में इसका स्तर बढ़ा हुआ था।

रिपोर्ट के अनुसार-

हालांकि, सभी मरीजों की इन जांचों के नतीजे उपलब्ध नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, 56.3 प्रतिशत मरीजों के विटामिन D और 88.3 प्रतिशत मरीजों के PTH के नतीजे मौजूद नहीं थे। ऐसे में इन आंकड़ों के आधार पर पूरे समूह में विटामिन D की कमी या PTH के बढ़े हुए स्तर को लेकर कोई पक्का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

समय पर जांच से मिल सकती है मदद-

आकाश हेल्थकेयर में ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. आशीष चौधरी ने कहा कि लोग अक्सर हड्डियों की सेहत को तब तक नजरअंदाज करते हैं, जब तक फ्रैक्चर न हो जाए या तेज दर्द की समस्या सामने न आए।उन्होंने कहा, “ये नतीजे बताते हैं कि हड्डियों का घनत्व कम होने की समस्या का समय रहते पता लगाना कितना जरूरी है। साथ ही, उन कारणों को समझना भी जरूरी है, जो शरीर में हड्डियों के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं।”

DEXA स्कैन से हड्डियों के घनत्व की जानकारी-

डॉ. चौधरी के मुताबिक, DEXA स्कैन से हड्डियों के घनत्व की जानकारी मिलती है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर विटामिन D, कैल्शियम और PTH जैसे टेस्ट कराने से शरीर में होने वाली गड़बड़ियों का पता लगाने में डॉक्टरों को मदद मिल सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि सही समय पर जांच, अच्छा पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, गिरने से बचाव और जरूरत के मुताबिक इलाज अपनाकर बढ़ती उम्र में भी हड्डियों की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे लोगों की चलने-फिरने की क्षमता और आत्मनिर्भरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या जरूरी है?

विशेषज्ञों के अनुसार, हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए:

समय पर जांच कराएं: डॉक्टर की सलाह के अनुसार DEXA स्कैन कराना फायदेमंद हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक है।

पोषण का ध्यान रखें: खाने में कैल्शियम और विटामिन D के पर्याप्त स्रोत शामिल करें।

शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां करें।

गिरने से बचाव करें: घर और आसपास की जगह को सुरक्षित रखें, ताकि गिरने और फ्रैक्चर का खतरा कम हो।

डॉक्टर की सलाह लें: जांच में कोई गड़बड़ी सामने आने पर खुद से दवाएं या सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

हड्डियों की सेहत को नजरअंदाज न करें-

विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस के मौके पर आकाश हेल्थकेयर ने हड्डियों की बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच कराने की जरूरत पर जोर दिया है।रिपोर्ट के नतीजे हड्डियों के घनत्व की जांच के साथ-साथ जरूरत के मुताबिक बायोकेमिकल टेस्ट और मरीज की व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को समझने के महत्व को भी सामने लाते हैं। हालांकि, यह विश्लेषण किसी बीमारी के कारण और उसके परिणाम के बीच सीधा संबंध साबित नहीं करता, लेकिन इससे यह समझने में मदद मिलती है कि हड्डियों की कमजोरी का समय रहते पता लगाना कितना जरूरी है।

फ्रैक्चर के खतरे को कम करें ऐसे-

समय पर जांच, सही खानपान और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज अपनाकर हड्डियों को स्वस्थ रखने, फ्रैक्चर के खतरे को कम करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।