TAPVC जैसी खतरनाक बीमारी से जूझते नवजात को मिली जिंदगी, 4 घंटे चली सर्जरी

दिल्ली के Fortis Escorts Heart Institute में 24 घंटे के नवजात की जटिल हार्ट सर्जरी से जान बचाई गई. TAPVC नाम की दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे इस बच्चे का सफल इलाज कर 11 दिन बाद स्वस्थ हालत में डिस्चार्ज किया गया.

TAPVC जैसी खतरनाक बीमारी से जूझते नवजात को मिली जिंदगी, 4 घंटे चली सर्जरी

यह कहानी किसी भी परिवार के लिए डरावने सपने जैसी है - लेकिन आखिर में उम्मीद और हिम्मत की मिसाल बन गई. दिल्ली के Fortis Escorts Heart Institute में एक ऐसा नवजात लाया गया जो सिर्फ 24 घंटे का था और जन्म लेते ही जिंदगी के लिए लड़ रहा था. उसके दिल में तो कोई बड़ी समस्या नहीं थी, लेकिन फेफड़ों में इतना ज्यादा कंजेशन था कि शरीर को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी. डॉक्टरों ने बताया कि उसे एक दुर्लभ और खतरनाक बीमारी थी, जिसे TAPVC कहते हैं - इसमें फेफड़ों से आने वाला ऑक्सीजन वाला खून दिल तक सही रास्ते से नहीं पहुंचता.

बच्चे की परेशानी का पता ऐसे चला-

इस बच्चे की परेशानी का पता मां की प्रेग्नेंसी के छठे महीने में ही अल्ट्रासाउंड और बाद में फीटल इको से चल गया था। माता-पिता खुद डॉक्टर हैं और पटना से दिल्ली सिर्फ इसलिए आए ताकि बच्चे का सही इलाज हो सके. पहले से ही प्लानिंग कर ली गई थी कि डिलीवरी अस्पताल के पास ही हो, ताकि बच्चे को तुरंत स्पेशल ट्रीटमेंट मिल सके.

सफलतापूर्वक किया ऑपरेशन-

जैसे ही बच्चा पैदा हुआ, उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत होने लगी और तुरंत उसे सपोर्ट पर रखा गया. फिर ICU में भर्ती करके उसकी जांच की गई और तुरंत सर्जरी का फैसला लिया गया. करीब 4 घंटे चली इस ओपन हार्ट सर्जरी में डॉक्टरों ने खून के बहाव को सही दिशा में कर दिया. इस मुश्किल ऑपरेशन को Dr. K S Iyer और Dr. Ashutosh Marwah की टीम ने सफलतापूर्वक किया. सर्जरी के बाद भी कुछ दिन बच्चे की हालत नाजुक रही, लेकिन धीरे-धीरे वह ठीक होने लगा। चौथे दिन उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया और 11 दिन बाद उसे स्वस्थ हालत में घर भेज दिया गया.

डायग्नोसिस और सही प्लानिंग-

डॉक्टरों के अनुसार, अगर इस बीमारी का समय पर पता न चलता और तुरंत इलाज न मिलता, तो जान बचाना मुश्किल हो सकता था। इस केस में सबसे बड़ी बात यह रही कि पहले से डायग्नोसिस और सही प्लानिंग की गई थी.

बच्चे की जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा कारण 3 चीजे-

बच्चे की मां ने बताया कि ये समय उनके लिए बहुत डर और तनाव से भरा था, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें हिम्मत दी. आज अपने बच्चे को सही से सांस लेते देखना उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. सीधी बात ये है, सही समय पर जांच, सही जगह डिलीवरी और तुरंत इलाज… यही तीन चीजें इस बच्चे की जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा कारण बनीं.