रोबोटिक सर्जरी में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत, दिल्ली-NCR बना बड़ा सेंटर; 2025 में 10,937 प्रोसीजर

भारत में रोबोटिक सर्जरी तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली-NCR के 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम लगे हैं और 2025 में यहां 10,937 रोबोटिक प्रोसीजर हुए। वहीं, पूरे देश में यह आंकड़ा 44,857 तक पहुंच गया। विशेषज्ञ अब रोबोटिक टेलीसर्जरी को सर्जरी का अगला बड़ा कदम मान रहे हैं।

रोबोटिक सर्जरी में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत, दिल्ली-NCR बना बड़ा सेंटर; 2025 में 10,937 प्रोसीजर

भारत में रोबोटिक सर्जरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है और दिल्ली-NCR इस बदलाव का एक बड़ा केंद्र बनकर सामने आया है। 'सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026' इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली-NCR में देश के सबसे ज्यादा रोबोटिक सिस्टम इंस्टॉल हैं और यहां रोबोटिक सर्जरी की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इसी रफ्तार से रोबोटिक सर्जरी का विस्तार जारी रहा, तो भारत 2030 तक इस क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी जगह बना सकता है।

दिल्ली-NCR में 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम-

हालिया इंस्टॉल्ड-बेस डेटा के मुताबिक, दिल्ली-NCR के 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम मौजूद हैं। इनमें 11 अस्पताल ऐसे हैं, जहां एक से ज्यादा रोबोटिक सिस्टम लगाए गए हैं। रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की संख्या में भी पिछले कुछ सालों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली-NCR में 2021 में 2,257 रोबोटिक प्रोसीजर हुए थे, जो 2022 में बढ़कर 3,594, 2023 में 5,024, 2024 में 7,595 और 2025 में 10,937 तक पहुंच गए। यानी चार साल में रोबोटिक प्रोसीजर की संख्या करीब पांच गुना बढ़ी है।

किन सर्जरी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल?

2025 में दिल्ली-NCR में हुए रोबोटिक प्रोसीजर में करीब 33% जनरल सर्जरी-बिनाइन, 30.2% यूरोलॉजी, 22.1% गायनेकोलॉजी और करीब 10% जनरल सर्जरी-मैलिग्नेंट यानी कैंसर से जुड़े प्रोसीजर थे। इसके अलावा सिर और गर्दन, थोरेसिक और कार्डियक सर्जरी में भी रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

पूरे भारत में भी तेजी से बढ़ रहा रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल-

रोबोटिक सर्जरी का विस्तार सिर्फ दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं है। पूरे देश में भी इसके इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में रोबोटिक-असिस्टेड प्रोसीजर की संख्या 2021 में 8,912 थी, जो 2025 में बढ़कर 44,857 हो गई। SRS इंडिया 2026 में विशेषज्ञों ने कहा कि यह बढ़ोतरी दिखाती है कि देश में रोबोटिक टेक्नोलॉजी के साथ-साथ सर्जिकल एक्सपर्टीज और इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया अहम मौका-

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने वीडियो मैसेज के जरिए कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत हेल्थकेयर इनोवेशन के एक अहम दौर से गुजर रहा है।उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और सर्जिकल रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को भारत के लिए इनोवेशन और ग्लोबल हेल्थकेयर में अपनी भूमिका बढ़ाने का बड़ा मौका बताया।

टेलीसर्जरी की तरफ बढ़ रहा अगला कदम-

रोबोटिक सर्जरी के बाद अब भारत में रोबोटिक टेलीसर्जरी पर भी तेजी से काम हो रहा है। इसका मकसद ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिसमें विशेषज्ञ सर्जन दूर बैठे मरीज की सर्जरी कर सकें।

हज़ारों किलोमीटर से ज्यादा दूरी से रोबोटिक टेलीसर्जरी की-

नई दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल के प्रो. डॉ. अनूप कुमार ने गुरुग्राम से हैदराबाद स्थित अस्पताल तक 1,600 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से रोबोटिक टेलीसर्जरी की। यह यूरोलॉजी में किसी सरकारी संस्थान के सर्जन द्वारा भारत की पहली रोबोटिक टेलीसर्जरी के तौर पर बताई गई है। इस तरह की तकनीक से भविष्य में बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

भारत-चीन के बीच भी हुआ टेली-सर्जरी डेमो-

रोबोटिक टेलीसर्जरी के क्षेत्र में भारत और चीन के बीच भी एक लाइव क्रॉस-बॉर्डर डेमो किया गया। SRS इंडिया के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विवेक बिंदल ने BORNS रोबोटिक्स के साथ मिलकर इस डेमो का नेतृत्व किया।

इसमें वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सर्जनों ने चीन के चेंगदू में करीब 5,000 किलोमीटर दूर मौजूद रोबोटिक कंसोल को दूर से ऑपरेट किया और प्री-क्लिनिकल प्रक्रियाएं पूरी कीं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी तकनीक भविष्य में टियर-2 और टियर-3 शहरों तक सुपर-स्पेशलिस्ट सर्जिकल एक्सपर्टीज पहुंचाने में मदद कर सकती है। साथ ही रिमोट ट्रेनिंग, टेली-मेंटोरिंग और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

टेलीसर्जरी में साइबर सिक्योरिटी और कनेक्टिविटी भी अहम-

दूर से रोबोटिक सर्जरी करना सिर्फ तकनीक का मामला नहीं है। इसमें मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी, साइबर सिक्योरिटी, सर्जनों की ट्रेनिंग, क्रेडेंशियलिंग, इमरजेंसी प्लान और रेगुलेटरी नियम भी बेहद जरूरी हैं। 2026 में 'वर्ल्ड जर्नल ऑफ सर्जरी' में प्रकाशित इंटरनेशनल कंसेंसस रिकमेंडेशंस में भी रिमोट रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी के लिए इन पहलुओं पर जोर दिया गया है। डॉ. विवेक बिंदल इस इंटरनेशनल कंसेंसस प्रकाशन के लेखकों में शामिल हैं।

2030 तक ग्लोबल लीडर बनने की उम्मीद-

SRS इंडिया 2026 में विशेषज्ञों ने भारत में रोबोटिक सर्जरी की बढ़ती क्षमता पर चर्चा की। दिल्ली-NCR में 39 अस्पतालों में रोबोटिक सिस्टम और 2025 में 10,937 रोबोटिक प्रोसीजर इस क्षेत्र के तेजी से विस्तार को दिखाते हैं। वहीं, पूरे भारत में 2025 में 44,857 रोबोटिक-असिस्टेड प्रोसीजर हुए।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब सिर्फ रोबोटिक टेक्नोलॉजी अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्लिनिकल अनुभव, इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों के इस्तेमाल के साथ आगे बढ़ रहा है। अब नजर इस बात पर है कि भारत रोबोटिक सर्जरी की इस बढ़ती क्षमता को किस तरह ग्लोबल स्तर पर अपनी मजबूत पहचान में बदलता है और टेलीसर्जरी जैसी नई तकनीकें इसमें कितना योगदान देती हैं।