दिल के मरीजों के लिए आधुनिक विकल्प: नारायणा अस्पताल में दो सफल लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन

नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम में दो मरीजों का सफलतापूर्वक लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन किया गया। कम इनवेसिव इस तकनीक के बाद दोनों मरीजों की स्थिति ठीक रही और उन्हें अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

दिल के मरीजों के लिए आधुनिक विकल्प: नारायणा अस्पताल में दो सफल लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन

 नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम में दो मरीजों में सफलतापूर्वक लीडलेस पेसमेकर इम्प्लांटेशन किया गया। इस प्रक्रिया के बाद दोनों मरीजों की रिकवरी अच्छी रही और उनकी चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए उन्हें अगले दिन ही अस्पताल से घर जाने की अनुमति दी गई।

इलाज की कहानी साझा-

अस्पताल में आयोजित एक खास बातचीत के दौरान दोनों मरीजों ने अपनी इलाज की पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि बीमारी का पता चलने के बाद उन्हें काफी चिंता थी और पेसमेकर लगवाने को लेकर भी कई सवाल मन में थे। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह और इलाज के बाद उनका आत्मविश्वास वापस आया और अब वे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

क्या है लीडलेस पेसमेकर?

लीडलेस पेसमेकर पारंपरिक पेसमेकर से काफी अलग होता है। यह आकार में छोटा होता है और इसे सीधे हृदय के अंदर लगाया जाता है। इसमें शरीर के अंदर पेसिंग लीड्स डालने की जरूरत नहीं होती और न ही त्वचा के नीचे पेसमेकर रखने के लिए अलग से सर्जिकल पॉकेट बनाना पड़ता है। इस वजह से, सही मरीजों के लिए यह पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में कम इनवेसिव विकल्प हो सकता है। हालांकि, हर मरीज के लिए यह तकनीक उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है। किस मरीज को किस तरह का पेसमेकर या उपचार दिया जाए, इसका फैसला उसकी मेडिकल स्थिति के आधार पर डॉक्टर करते हैं।

डॉक्टर ने क्या कहा?

नारायणा हेल्थ के डायरेक्टर, दिल्ली-एनसीआर क्लस्टर, कॉरपोरेट ग्रोथ इनिशिएटिव्स, नॉर्थ, डॉ. अजय कोहली ने कहा कि आधुनिक कार्डियक तकनीक का मकसद सिर्फ नई तकनीक को अपनाना नहीं, बल्कि मरीजों के लिए इलाज को ज्यादा सुविधाजनक और आसान बनाना भी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कोशिश रहती है कि मरीज की स्थिति के अनुसार सही इलाज उपलब्ध कराया जाए और रिकवरी के दौरान भी उसे बेहतर देखभाल मिले।

पेसमेकर तकनीक में काफी बदलाव-

वहीं, नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम के सीनियर डायरेक्टर एवं प्रोग्राम हेड-कार्डियोलॉजी डॉ. (प्रो.) हेमंत मदान ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पेसमेकर तकनीक में काफी बदलाव आया है। लीडलेस पेसमेकर हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्या वाले कुछ मरीजों के लिए एक अहम विकल्प बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि लीडलेस पेसमेकर में पारंपरिक पेसमेकर की तरह पेसिंग लीड्स और त्वचा के नीचे सर्जिकल पॉकेट की जरूरत नहीं होती। हालांकि, मरीज के लिए कौन-सा उपचार बेहतर रहेगा, यह उसकी व्यक्तिगत मेडिकल स्थिति पर निर्भर करता है।

मरीजों की अपनी भावनात्मक यात्रा-

दोनों मरीजों ने अपनी भावनात्मक यात्रा साझा करते हुए बताया कि बीमारी के शुरुआती दौर में उन्हें डर और चिंता थी, लेकिन इलाज के बाद उनका भरोसा बढ़ा। उनके अनुभवों से यह भी सामने आया कि दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान और सही विशेषज्ञ से इलाज लेना बेहद जरूरी है।

आधुनिक कार्डियक तकनीक  की सफल प्रक्रियाएं-

नारायणा अस्पताल, गुरुग्राम में हुई ये सफल प्रक्रियाएं आधुनिक कार्डियक तकनीक के इस्तेमाल और मरीजों को बेहतर उपचार व रिकवरी का अनुभव देने की दिशा में अस्पताल के प्रयास को दर्शाती हैं।