95 रुपये से शुरू हुआ सफर, अब 55वें साल में पहुंची कश्मीरी गेट की रामलीला

11 अक्टूबर से कश्मीरी गेट के तिकोना पार्क में 55वें वर्ष की रामलीला का आगाज होगा। 95 रुपये से शुरू हुई यह परंपरा आज भी आस्था, संस्कृति और संस्कारों का संदेश दे रही है। जानिए इस साल की रामलीला में क्या रहेगा खास।

95 रुपये से शुरू हुआ सफर, अब 55वें साल में पहुंची कश्मीरी गेट की रामलीला

दिल्ली की पुरानी और मशहूर रामलीला परंपराओं में शामिल कश्मीरी गेट की रामलीला इस बार अपने 55वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। श्री नवयुवक रामलीला कमेटी कश्मीरी गेट की ओर से रामलीला का आयोजन 11 अक्टूबर से तिकोना पार्क, कश्मीरी गेट में किया जाएगा। इसे लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं।

भारतीय संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत करने की कोशिश-

कमेटी के मुताबिक मंच, सुरक्षा व्यवस्था और दर्शकों की सुविधाओं से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कमेटी का कहना है कि यहां रामलीला को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और भारतीय संस्कृति से जोड़कर प्रस्तुत करने की कोशिश की जाती है।

रामलीला के दौरान सात्विक जीवन पर जोर-

कमेटी के महासचिव, पूर्व मेयर एवं जत्थेदार सरदार अवतार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस रामलीला की एक खास परंपरा है। उनके अनुसार लीला के पूरे दिनों में कलाकार और आयोजन से जुड़े पदाधिकारी सात्विक भोजन करते हैं और जमीन पर सोते हैं।उन्होंने कहा कि कश्मीरी गेट की रामलीला में परिवार और बच्चों के साथ आने वाले दर्शकों के लिए धार्मिक और संस्कारपूर्ण माहौल बनाए रखने पर खास ध्यान दिया जाता है। आयोजन स्थल पर अनावश्यक झूलों और खान-पान के स्टॉलों की भीड़ नहीं रखी जाती, ताकि लोग पूरे मन से रामलीला का आनंद ले सकें।

95 रुपये से शुरू हुआ था सफर-

सरदार अवतार सिंह ने रामलीला के पुराने सफर को याद करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 1972 में महज 95 रुपये से हुई थी। उस समय संसाधन सीमित थे, लेकिन संस्थापकों और कार्यकर्ताओं की आस्था और मेहनत से यह परंपरा आगे बढ़ती रही।

कई चुनौतियों का सामना-

उन्होंने कहा कि इन वर्षों में कमेटी को आर्थिक और व्यवस्थागत कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन रामलीला को जारी रखने का प्रयास कभी नहीं रुका। उनके मुताबिक आज 55वें वर्ष तक पहुंचना श्रद्धालुओं के सहयोग और प्रभु श्रीराम की कृपा का परिणाम है।

अलग-अलग समुदायों के लोग भी पहुंचते हैं-

कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समाजसेवी श्रीमती मोहनजीत कौर ने कहा कि कश्मीरी गेट की रामलीला किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग भी अपने परिवार और बच्चों के साथ यहां रामलीला देखने पहुंचते हैं।

निजी सुरक्षा गार्ड तैनात-

उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा मंच बताया। सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि रामलीला स्थल पर अलग-अलग जगहों पर सीसीटीवी कैमरे, कमेटी के सुरक्षा वॉलंटियर, दिल्ली पुलिस के जवान और निजी सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे।

तिकोना पार्क का अपना ऐतिहासिक महत्व-

रामलीला कमेटी के मुख्य सलाहकार अमिताभ ने तिकोना पार्क के ऐतिहासिक महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह मैदान सिर्फ धार्मिक आयोजन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका ऐतिहासिक जुड़ाव भी है। उनके अनुसार महात्मा गांधी भी इस स्थान पर आए थे और यहां तीन दिनों तक ठहरे थे। कमेटी का कहना है कि ऐसे ऐतिहासिक स्थान पर रामलीला का आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ इस जगह के इतिहास को भी याद करने का मौका देता है।

बच्चों और युवाओं को संस्कृति से जोड़ने की कोशिश-

कमेटी के पदाधिकारियों के मुताबिक 55 साल से चली आ रही यह रामलीला सिर्फ मंच पर होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता से जुड़ी विरासत है। कमेटी का प्रयास है कि आधुनिक दौर में भी रामलीला के पारंपरिक और धार्मिक स्वरूप को बनाए रखा जाए और बच्चों व युवाओं को भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित कराया जाए।

प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे-

प्रेस वार्ता में कमेटी के चेयरमैन नरेंद्र मदान, अध्यक्ष राजकुमार जैन, जनसंपर्क अधिकारी अरुण भटनागर, संयुक्त सचिव राजीव गोयल, प्रेसिडेंट राकेश ठाकुर, चीफ ऑब्जर्वर एवं प्रमोटर सौरव गौरव, एडवरटाइजमेंट एवं प्रेस रिलेशन प्रफुल्ल मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट देवेंद्र यादव, व्यवस्था प्रमुख जस्सी सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लें-

कमेटी ने दिल्लीवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे 11 अक्टूबर से तिकोना पार्क, कश्मीरी गेट पहुंचकर परिवार और बच्चों के साथ रामलीला देखें और भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लें।