मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और BAPIO की पहल, आयुष डॉक्टरों को मिलेगी नई ट्रेनिंग

आयुष डॉक्टरों की ट्रेनिंग के लिए भारत-ब्रिटेन ने मिलाया हाथ। छह महीने के दो नए कोर्स से डॉक्टरों की स्किल बढ़ाने और मरीजों को बेहतर देखभाल देने पर जोर रहेगा।

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और BAPIO की पहल, आयुष डॉक्टरों को मिलेगी नई ट्रेनिंग

 भारत और ब्रिटेन के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की गई है। मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स और BAPIO ट्रेनिंग एकेडमी ने आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयुष डॉक्टरों की क्लीनिकल ट्रेनिंग और कौशल बढ़ाने के लिए दो विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की घोषणा की है।

कार्यक्रम का उद्घाटन-

इस पहल का ऐलान दिल्ली में आयोजित दूसरे इंडो-यूके हेल्थकेयर कॉन्क्लेव 2026 में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने किया। इस सम्मेलन में भारत और ब्रिटेन के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, डॉक्टरों, शिक्षाविदों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

छह-छह महीने के होंगे दो सर्टिफिकेट कोर्स-

इस पहल के तहत आयुष के ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों के लिए छह-छह महीने के दो कोर्स तैयार किए गए हैं। इनका मकसद डॉक्टरों के क्लीनिकल कौशल को बेहतर बनाना, मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान देना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करना है।

'एक्यूट केयर एंड इमरजेंसी सपोर्ट’-

पहला कोर्स ‘एक्यूट केयर एंड इमरजेंसी सपोर्ट’ होगा। इसमें डॉक्टरों को इमरजेंसी की स्थिति पहचानने, मरीज की हालत बिगड़ने पर सही समय पर विशेषज्ञ के पास भेजने, मरीज की जानकारी दर्ज करने और मेडिकल टीम के साथ मिलकर काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका फोकस इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर में सहयोग देने की क्षमता बढ़ाना है।

‘लाइफस्टाइल हेल्थ एंड वेल-बीइंग काउंसलिंग एंड प्रैक्टिस’-

दूसरा कोर्स ‘लाइफस्टाइल हेल्थ एंड वेल-बीइंग काउंसलिंग एंड प्रैक्टिस’ होगा। इसमें खानपान, एक्सरसाइज, अच्छी नींद, तनाव को संभालने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और बीमारियों से बचाव के तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही डॉक्टरों को मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह देने और जरूरत पड़ने पर दूसरे विशेषज्ञों के पास भेजने के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आयुष डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर क्यों है जोर?

आज स्वास्थ्य सेवाओं में सिर्फ बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि समय पर बीमारी की पहचान, मरीज की सुरक्षा और बीमारियों से बचाव भी बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन कोर्स में पढ़ाई के साथ अस्पतालों में विशेषज्ञों की निगरानी में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और कौशल का आकलन भी शामिल किया गया है।

पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का समृद्ध अनुभव-

आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा कि भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का समृद्ध अनुभव है, जबकि ब्रिटेन को क्लीनिकल गवर्नेंस, मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाओं का अनुभव है। दोनों देशों के अनुभवों से स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक शोध, उचित चिकित्सकीय प्रमाण और गुणवत्ता मानकों का समर्थन मिलना जरूरी है।

मरीजों को बेहतर इलाज देना है मुख्य लक्ष्य-

मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य साझेदारी की असली सफलता इस बात से तय होती है कि उससे मरीजों और मेडिकल टीम को कितना फायदा मिलता है। उन्होंने बताया कि इस पहल में व्यवस्थित ट्रेनिंग, विशेषज्ञों की निगरानी में अभ्यास और गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया गया है।

एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं-

वहीं, BAPIO ट्रेनिंग एकेडमी के सीईओ और इंडो-यूके हेल्थकेयर अलायंस के वाइस चेयर प्रो. पराग सिंघल OBE ने कहा कि भारत और ब्रिटेन एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं। साझा ट्रेनिंग, पढ़ाई और क्लीनिकल सहयोग के जरिए डॉक्टरों की क्षमताओं को बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत बनाया जा सकता है।

भारत-ब्रिटेन के स्वास्थ्य सहयोग को मिलेगी नई दिशा-

दो दिवसीय इंडो-यूके हेल्थकेयर कॉन्क्लेव का विषय ‘ब्रिजिंग हेल्थकेयर, एजुकेशन एंड इनोवेशन’ यानी स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और नई तकनीकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। इस पहल के जरिए दोनों संस्थाओं का लक्ष्य स्वास्थ्य क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाला सहयोग विकसित करना है, ताकि डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सके और मरीजों की देखभाल में सुधार हो।कुल मिलाकर, इन दो सर्टिफिकेट कोर्स के जरिए आयुष डॉक्टरों के कौशल को बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर तालमेल बनाने और मरीजों की सुरक्षा व देखभाल को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया गया है।