एक अंगदान, कई जिंदगियां: फोर्टिस और NOTTO ने ‘जीवन का उपहार दें’ पहल से बढ़ाई जागरूकता

भारत में अंगों की कमी के बीच फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला और NOTTO ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृत व्यक्ति से अंगदान बढ़ाने, जागरूकता फैलाने और जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी देने पर जोर दिया।

एक अंगदान, कई जिंदगियां: फोर्टिस और NOTTO ने ‘जीवन का उपहार दें’ पहल से बढ़ाई जागरूकता

देश में अंगों की कमी और ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला और नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (NOTTO) ने मिलकर ‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ़’ यानी ‘जीवन का उपहार दें’ नाम से एक खास पहल शुरू की है। वर्ल्ड ऑर्गन डोनेशन डे 2026 से पहले आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों और हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स ने अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

मकसद-

कार्यक्रम का मुख्य मकसद देश में मृत व्यक्ति से अंगदान को बढ़ावा देना, अंगों की कमी को कम करना और लोगों को अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में ट्रांसप्लांट की मेडिकल सुविधाएं और सर्जरी लगातार बेहतर हो रही हैं, लेकिन जरूरत के मुताबिक अंग उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

भारत में अंगदान की बड़ी चुनौती-

भारत में अंगदान की दर अभी भी प्रति 10 लाख आबादी पर एक से कम बताई जाती है। वहीं, स्पेन और अमेरिका जैसे देशों में यह दर काफी ज्यादा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हुए 2,805 मरीजों की मौत हुई। वहीं, मार्च 2026 तक करीब 90 हजार मरीज राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट वेटिंग लिस्ट में थे।

हालांकि देश में ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़ी है, लेकिन कुल ट्रांसप्लांट में मृत दाताओं से मिलने वाले अंगों की हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि मृत व्यक्ति से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए लोगों के बीच जागरूकता और भरोसा बढ़ाना बेहद जरूरी है।

‘एक डोनर कई जिंदगियां बचा सकता है’-

प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत NOTTO के डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार ने की। उन्होंने कहा कि भारत के पास बेहतरीन सर्जिकल विशेषज्ञता और आधुनिक ट्रांसप्लांट सुविधाएं हैं, लेकिन अंगों की कमी के कारण हर साल कई मरीजों की जान चली जाती है।

उन्होंने बताया कि एक मृत अंगदाता कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है। उनका कहना था कि ब्रेन डेथ को लेकर मौजूद गलतफहमियों को दूर करने और अंगदान की प्रक्रिया को लेकर लोगों को सही जानकारी देने की जरूरत है।

डॉक्टरों ने बताया अंगदान का महत्व-

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में एडल्ट कार्डियक सर्जरी के चेयरमैन और हेड डॉ. ज़ेड.एस. मेहरवाल ने कहा कि गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे कुछ मरीजों के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट नई जिंदगी का मौका बन सकता है। ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधाओं ने डोनर ऑर्गन को समय पर मरीज तक पहुंचाना आसान बनाया है, लेकिन सबसे जरूरी चीज है—अंगों की उपलब्धता।

मेडिकल तकनीक में लगातार प्रगति-

लिवर ट्रांसप्लांट और हेपाटो-बिलियरी साइंसेज के चेयरमैन डॉ. विवेक विज ने कहा कि भारत में लिवर की गंभीर बीमारी का बोझ काफी ज्यादा है। मेडिकल तकनीक में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन सिर्फ इलाज की बेहतर सुविधाओं से अंगों की कमी दूर नहीं होगी। इसके लिए मृत और जीवित दोनों तरह के अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी।

जीवन को बेहतर बनाने का बड़ा मौका-

वहीं, नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. संजीव गुलाटी ने कहा कि किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट जीवन को बेहतर बनाने का बड़ा मौका देता है। लेकिन किडनी की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर अभी भी चुनौती बना हुआ है।

दूसरे व्यक्ति को जिंदगी का दूसरा मौका देने की पहल-

यूरोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. पंकज पंवार ने लोगों से अपील की कि वे अंगदान का संकल्प लेने के साथ-साथ अपने परिवार से भी इस फैसले के बारे में बातचीत करें। उन्होंने कहा कि अंगदान सिर्फ एक अंग देने की बात नहीं है, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति को जिंदगी का दूसरा मौका देने की पहल है।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला ने साझा किया अनुभव-

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला के वाइस प्रेसिडेंट और SBU हेड डॉ. विक्रम अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में अब तक 23 हार्ट ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय पर मिलने वाला डोनर ऑर्गन किसी मरीज और उसके परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल सकता है।

उन्होंने कहा कि अंगदान को लेकर बातचीत सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके बारे में घरों, स्कूलों, समुदायों और समाज के अलग-अलग हिस्सों में बात होनी चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अंगदान के महत्व को समझें और आगे आएं।

जागरूकता से बदलेगी तस्वीर-

इस संयुक्त पहल के जरिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने साफ संदेश दिया कि भारत में ट्रांसप्लांट की सुविधाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन अंगों की उपलब्धता बढ़ाए बिना इसका पूरा फायदा मरीजों तक नहीं पहुंच पाएगा।

अंगदान का संकल्प लेने पर विचार-

‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ़’ का संदेश यही है कि अंगदान के बारे में सही जानकारी हासिल करें, अपने परिवार से इस विषय पर बात करें और अपनी इच्छा के अनुसार अंगदान का संकल्प लेने पर विचार करें। एक सही फैसला किसी जरूरतमंद के लिए जिंदगी की नई उम्मीद बन सकता है।