64 साल के मरीज के लिए डॉक्टरों ने अपनाया अनोखा तरीका, एक साथ हुआ हार्ट और कैंसर का इलाज
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के डॉक्टरों ने 64 वर्षीय मरीज की महाधमनी, खराब हार्ट वाल्व और किडनी कैंसर जैसी तीन गंभीर समस्याओं का एक ही अस्पताल स्टे के दौरान सफल इलाज किया। मरीज की हार्ट सर्जरी के बाद रोबोट-असिस्टेड सर्जरी से किडनी का कैंसर ट्यूमर निकाला गया और स्वस्थ किडनी को सुरक्षित रखा गया।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के डॉक्टरों ने 64 साल के एक मरीज का एक ही अस्पताल स्टे के दौरान तीन गंभीर बीमारियों का सफल इलाज किया। मरीज की महाधमनी (Aorta) में गंभीर समस्या थी, हार्ट वाल्व से काफी रिसाव हो रहा था और बाईं किडनी में कैंसर का ट्यूमर भी पाया गया था।
किडनी में कैंसर का ट्यूमर-
मरीज अस्पताल पहुंचे तो उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम करने पर भी उन्हें काफी हांफने लगते थे। जांच में सामने आया कि उनकी महाधमनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी, हार्ट वाल्व ठीक से काम नहीं कर रहा था और किडनी में कैंसर का ट्यूमर था।

एक साथ इलाज का लिया फैसला-
तीनों समस्याओं में इलाज में देरी करना खतरनाक हो सकता था। महाधमनी कभी भी फट सकती थी, वाल्व से लगातार हो रहे रिसाव से हार्ट कमजोर हो रहा था और किडनी का कैंसर आगे फैलने का खतरा था। आमतौर पर ऐसी गंभीर बीमारियों का इलाज अलग-अलग सर्जरी के जरिए किया जाता है। लेकिन इस मरीज के मामले में डॉक्टरों ने तय किया कि अलग-अलग ऑपरेशन के बीच ज्यादा समय देना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए कार्डियक सर्जरी और किडनी कैंसर की सर्जरी को एक ही अस्पताल स्टे में करने का फैसला लिया गया।
पहले हार्ट को किया स्थिर-
डॉक्टरों ने सबसे पहले जटिल ओपन-हार्ट सर्जरी के जरिए खराब हार्ट वाल्व को बदला और क्षतिग्रस्त महाधमनी की मरम्मत की। इसके लिए एडवांस ‘फ्रोजन एलीफेंट ट्रंक’ ग्राफ्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में ग्राफ्ट के साथ स्टेंट का इस्तेमाल कर महाधमनी को एक ही प्रक्रिया में ठीक किया जाता है। हार्ट की सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर होते ही यूरोलॉजी टीम ने किडनी के कैंसर का इलाज शुरू किया।
रोबोट की मदद से निकाला किडनी ट्यूमर-
यूरोलॉजी टीम ने रोबोट-असिस्टेड सर्जरी के जरिए बाईं किडनी में मौजूद कैंसरग्रस्त ट्यूमर को बाहर निकाला। इस दौरान किडनी के स्वस्थ हिस्से को बचाए रखा गया। डॉक्टरों के मुताबिक, रोबोटिक तकनीक की मदद से सर्जनों को ऑपरेशन के दौरान बेहतर विजुअलाइजेशन और अधिक सटीकता मिली।
कम से कम रक्तस्राव और सर्जिकल स्ट्रेस रखना भी जरूरी-
मरीज की हाल ही में हुई हार्ट सर्जरी को देखते हुए कम से कम रक्तस्राव और सर्जिकल स्ट्रेस रखना भी बेहद जरूरी था। रोबोट-असिस्टेड पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी इस लिहाज से मददगार रही।
ऑपरेशन के बाद सांस लेने में हुआ सुधार-
सर्जरी के बाद मरीज की सांस लेने की समस्या में सुधार हुआ और हार्ट फंक्शन भी बेहतर हुआ। उनकी रिकवरी अच्छी रही और स्थिर हालत में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब मरीज स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

दोनों सर्जरी को एक ही ऑपरेशन में करना बेहद जटिल-
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के एडल्ट कार्डियो थोरेसिक एंड वास्क्युलर सर्जरी के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर डॉ. शिव कुमार चौधरी ने कहा कि ओपन-हार्ट रिपेयर और रोबोट-असिस्टेड किडनी कैंसर सर्जरी को एक ही ऑपरेशन में करना बेहद जटिल था। उन्होंने बताया कि महाधमनी की सर्जरी के दौरान मरीज के अंगों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी।

मेडिकल टीमों के बीच बेहतर तालमेल ने महत्वपूर्ण भूमिका-
डॉ. मिलिंद पदमाकर होते, डायरेक्टर, एडल्ट कार्डियो थोरेसिक एंड वास्क्युलर सर्जरी ने कहा कि इस केस में अलग-अलग मेडिकल टीमों के बीच बेहतर तालमेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हार्ट की सर्जरी के बाद मिली स्थिर स्थिति का फायदा उठाकर यूरोलॉजी टीम ने किडनी ट्यूमर को निकाल दिया और स्वस्थ किडनी टिश्यू को बचाए रखा।

रोबोटिक सर्जरी से जटिल सर्जिकल क्षेत्र को हाई-डेफिनिशन विजुअलाइजेशन के साथ संभालना संभव-
डॉ. पंकज पंवार, एडिशनल डायरेक्टर, एडल्ट कार्डियो थोरेसिक एंड वास्क्युलर सर्जरी ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से जटिल सर्जिकल क्षेत्र को हाई-डेफिनिशन विजुअलाइजेशन और अधिक सटीकता के साथ संभालना संभव हुआ। इससे किडनी के स्वस्थ हिस्से को बचाते हुए ट्यूमर निकालने में मदद मिली।

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का एक साथ काम करना बेहद महत्वपूर्ण-
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, ओखला के वाइस प्रेसिडेंट और फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. विक्रम अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के जटिल मामलों में कार्डियक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का एक साथ काम करना बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, यह केस मल्टी-डिसिप्लीनरी मेडिकल टीम के बेहतर तालमेल को दिखाता है।

अपनी तरह का बेहद दुर्लभ मामला-
अस्पताल के अनुसार, ओपन-हार्ट रिपेयर और रोबोटिक किडनी कैंसर सर्जरी को एक ही अस्पताल स्टे में एक साथ करने का यह अपनी तरह का बेहद दुर्लभ मामला है।