लंग फेलियर मरीजों के लिए फोर्टिस का बड़ा कदम, शालीमार बाग और वसंत कुंज में शुरू हुए स्पेशल क्लीनिक

फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग और वसंत कुंज में लंग फेलियर क्लीनिक शुरू किए गए हैं। यहां गंभीर और अंतिम चरण की फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ जांच, मेडिकल ट्रीटमेंट, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन और लंग ट्रांसप्लांट से जुड़ी सेवाएं एक ही जगह पर मिलेंगी। हाल ही में शालीमार बाग में 29 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट का डबल लंग ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया गया।

लंग फेलियर मरीजों के लिए फोर्टिस का बड़ा कदम, शालीमार बाग और वसंत कुंज में शुरू हुए स्पेशल क्लीनिक

फेफड़ों की गंभीर और अंतिम चरण की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग और फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज ने लंग फेलियर क्लीनिक शुरू किए हैं। इन क्लीनिकों का मकसद ऐसे मरीजों को एक ही जगह पर विशेषज्ञों की मदद से जांच, इलाज, रिहैबिलिटेशन और जरूरत पड़ने पर लंग ट्रांसप्लांट से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स मिलकर मरीज की स्थिति का आकलन करेंगे-

शालीमार बाग स्थित क्लीनिक हर मंगलवार और शुक्रवार दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चलेगा। वसंत कुंज क्लीनिक के संचालन का शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा। इन क्लीनिकों में पल्मोनोलॉजिस्ट, लंग ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट और दूसरे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स मिलकर मरीज की स्थिति का आकलन करेंगे। मरीजों को बीमारी के अनुसार दवाओं को बेहतर करने, फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच, रिहैबिलिटेशन और जरूरत पड़ने पर लंग ट्रांसप्लांट के लिए सलाह दी जाएगी।

किन मरीजों को मिलेगा फायदा?

एडवांस लंग फेलियर से जूझ रहे मरीजों की विस्तृत जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि उनके लिए लंग ट्रांसप्लांट सही विकल्प है या नहीं। ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त मरीजों को प्री-ट्रांसप्लांट काउंसलिंग, जरूरी जांच और ट्रांसप्लांट के बाद फॉलो-अप की सुविधा भी मिलेगी।

खास जानकारी-

इसके अलावा यहां एडवांस पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, ब्रॉन्कोस्कोपी, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, पोषण संबंधी सलाह, नींद से जुड़ी जांच और नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। मरीजों और उनके परिवार के सदस्यों को बीमारी और उसकी देखभाल के बारे में जरूरी जानकारी भी दी जाएगी।

29 साल की फिजियोथेरेपिस्ट को मिला नया जीवन-

इसी पहल के बीच फोर्टिस शालीमार बाग में 29 साल की एक फिजियोथेरेपिस्ट का डबल-लंग ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक किया गया। उन्हें 2021 में इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) का पता चला था। इस बीमारी में समय के साथ फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इलाज के बावजूद उनकी सांस लेने की समस्या लगातार बढ़ती गई। 2023 में उन्हें फेफड़ों के गंभीर संक्रमण और सेप्सिस के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 2025 के अंत तक उनकी फेफड़ों की क्षमता काफी कम हो गई थी और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ रही थी।

डबल-लंग ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया-

स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लीनरी टीम ने उनका लंग ट्रांसप्लांट के लिए मूल्यांकन किया। आखिरकार मई 2026 में उनका डबल-लंग ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। इस केस ने यह भी दिखाया कि गंभीर लंग डिजीज में समय पर विशेषज्ञों से सलाह और ट्रांसप्लांट के लिए सही समय पर मूल्यांकन कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि, डायरेक्टर–लंग ट्रांसप्लांट एंड एडवांस लंग फेलियर, ग्लेनईगल्स हॉस्पिटल, चेन्नई ने कहा कि गंभीर फेफड़ों की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके पीछे वायु प्रदूषण, तंबाकू का सेवन या उसके संपर्क में आना, काम से जुड़े जोखिम, संक्रमण और बढ़ती उम्र जैसे कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई मरीज तब विशेषज्ञों तक पहुंचते हैं जब उनकी बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में समय पर बीमारी की पहचान, सही समय पर रेफरल और विशेषज्ञों की टीम से इलाज मरीजों के नतीजों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

एडवांस लंग डिजीज धीरे-धीरे मरीज की सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करती है-

फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग के डॉ. विकास मौर्या ने कहा कि एडवांस लंग डिजीज धीरे-धीरे मरीज की सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करती है, जिससे रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे मरीजों के लिए समर्पित लंग फेलियर क्लीनिक में बीमारी के अलग-अलग चरणों पर विशेषज्ञ सलाह और इलाज के विकल्प उपलब्ध कराना काफी मददगार हो सकता है।

बीमारियों का इलाज केवल लक्षणों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए-

वहीं, फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज के डॉ. प्रशांत सक्सेना ने कहा कि गंभीर सांस संबंधी बीमारियों का इलाज केवल लक्षणों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, रिहैबिलिटेशन, न्यूट्रिशन और ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों की संयुक्त देखभाल से मरीज की लंबे समय की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है।

350 से अधिक हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट का अनुभव-

फोर्टिस हेल्थकेयर की चीफ ग्रोथ एंड इनोवेशन ऑफिसर डॉ. ऋतु गर्ग ने कहा कि लंग फेलियर क्लीनिक शुरू करना जटिल फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ और एकीकृत देखभाल देने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि डॉ. गोविनी बालासुब्रमणि के पास 350 से अधिक हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट का अनुभव है और उन्होंने देश में लंग ट्रांसप्लांट कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

फोर्टिस का लक्ष्य-

कुल मिलाकर, इन लंग फेलियर क्लीनिकों के जरिए फोर्टिस का लक्ष्य गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जांच से लेकर इलाज, रिहैबिलिटेशन और जरूरत पड़ने पर ट्रांसप्लांट तक की सेवाएं एक समन्वित व्यवस्था में उपलब्ध कराना है।