विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026: सिंधी समाज ने याद की विस्थापन की पीड़ा और संघर्ष की गाथा
सिंधु समाज दिल्ली और राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 मनाया गया। कार्यक्रम में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान सिंधी समाज के विस्थापन, संघर्ष और पीड़ा को याद किया गया। बुजुर्गों ने अपनी आपबीती साझा की और उन्हें सम्मानित भी किया गया।
नई दिल्ली में सिंधु समाज दिल्ली (पंजीकृत) और राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 मनाया गया। कार्यक्रम में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान सिंधी समाज के लोगों की पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को याद किया गया। इस दौरान उन लोगों को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने विभाजन के समय अपना घर-बार और सब कुछ छोड़कर भारत का रुख किया था।
कार्यक्रम का मकसद-
कार्यक्रम का मकसद उस दौर की यादों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना था, ताकि युवा यह जान सकें कि विभाजन के समय सिंध प्रांत से भारत आए लोगों ने किन मुश्किलों का सामना किया और किस तरह नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू की।

प्रधानमंत्री के आह्वान पर कार्यक्रम का आयोजन-
सिंधु समाज दिल्ली (पंजीकृत) के महासचिव नरेश बेलानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि विभाजन के समय जिन लोगों ने खुद वह दर्द झेला था, आज उनकी उम्र काफी हो चुकी है। इसलिए उन्हें कार्यक्रम में बुलाकर उनकी आपबीती सुनी गई और सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में उन लोगों को भी शामिल किया गया, जो विभाजन के समय छोटे बच्चे थे। इन लोगों ने अपने माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी से जुड़ी उस दौर की यादें साझा कीं। उनके अनुभवों से उस समय सिंधी समाज ने किस तरह की मुश्किलें झेली थीं, इसकी तस्वीर सामने आई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य-
वहीं, सिंधु समाज दिल्ली (पंजीकृत) के अध्यक्ष जगदीश नागरानी ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को विभाजन के दौरान सिंधी समाज के संघर्ष के बारे में बताना है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज के लोगों ने सिंध में अपना सब कुछ छोड़कर भारत में नई जिंदगी शुरू की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने दम पर पहचान बनाई।

विभाजन की पीड़ा सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं-
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की पीड़ा सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों की यादों और अनुभवों में आज भी मौजूद है। इसी विरासत को संभालकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि संघर्ष, साहस और मेहनत की यह कहानी आने वाले समय में भी याद रखी जाए।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस-
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026 के जरिए सिंधी समाज ने उन सभी परिवारों को याद किया, जिन्होंने विस्थापन का दर्द सहा और भारत में अपने जीवन को फिर से खड़ा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।