भारत में पहली बार विदेशी मरीज में सफल हुआ Pivot Extend System इंप्लांट, फोर्टिस ने रचा इतिहास
गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (FMRI) ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो की 35 वर्षीय महिला में पहली बार Pivot Extend System सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया। यह भारत में किसी विदेशी मरीज में इस डिवाइस का पहला, दिल्ली-एनसीआर का पहला और देश का तीसरा मामला है। इस प्रक्रिया से गंभीर ट्राइकस्पिड वाल्व लीकेज में काफी राहत मिली और मरीज की हालत में सुधार हुआ।
गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (FMRI) ने दिल के इलाज के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने त्रिनिदाद और टोबैगो की 35 वर्षीय महिला मरीज के दिल में पिवट एक्सटेंड सिस्टम (Pivot Extend System) नाम का एक खास ट्रांसकैथेटर डिवाइस सफलतापूर्वक लगाया है। यह भारत में पहली बार किसी विदेशी मरीज में किया गया ऐसा इलाज है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर में यह अपनी तरह का पहला और पूरे देश में तीसरा मामला है।
ट्राइकस्पिड रीगर्जिटेशन नाम की गंभीर बीमारी-
मरीज लंबे समय से ट्राइकस्पिड रीगर्जिटेशन (Tricuspid Regurgitation) नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। इस बीमारी में दिल का एक वाल्व ठीक से बंद नहीं होता, जिससे खून उल्टी दिशा में बहने लगता है। इसका असर दिल की पंपिंग क्षमता पर पड़ता है और मरीज को सांस लेने में तकलीफ, पैरों और पेट में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं।
दिल पहले से ही कमजोर और हालत काफी नाजुक-
महिला की हालत काफी नाजुक थी। उनका दिल पहले से ही कमजोर था और करीब 8–10 साल पहले उन्हें स्पेशल पेसमेकर भी लगाया गया था। इस साल की शुरुआत में उनके दिल के आसपास जमा तरल पदार्थ निकालने के लिए भी एक प्रक्रिया करनी पड़ी थी। लगातार बिगड़ती हालत के कारण सामान्य इलाज उनके लिए कारगर नहीं था।

हार्ट ट्रांसप्लांट ही एक विकल्प-
डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट ट्रांसप्लांट ही एक विकल्प था, लेकिन मरीज के दिल की बनावट ऐसी थी कि पारंपरिक या मिनिमली इनवेसिव तकनीकें उनके लिए उपयुक्त नहीं थीं। ऐसे में फोर्टिस की विशेषज्ञ टीम ने भारत सरकार से विशेष अनुमति लेकर विदेश से पिवट एक्सटेंड सिस्टम मंगवाया।
इलाज के बाद मरीज की हालत स्थिर-
22 जुलाई 2026 को सबसे पहले मरीज के पेसमेकर का पल्स जनरेटर बदला गया। इसके दो दिन बाद, 24 जुलाई को इस खास डिवाइस को सफलतापूर्वक लगाया गया। यह डिवाइस वाल्व के रिसाव वाले हिस्से में बैलून स्पेसर की मदद से लगाया जाता है, जिससे खून का पीछे की ओर बहना काफी हद तक कम हो जाता है। अगले दिन किए गए इकोकार्डियोग्राम में यह साफ हुआ कि वाल्व से होने वाला रिसाव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। इलाज के बाद मरीज की हालत स्थिर हुई और उन्हें जरूरी सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित-
फोर्टिस के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. (कर्नल) मंजिंदर सिंह संधू ने बताया कि यह डिवाइस बीमारी का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन उन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है जिनके पास इलाज के बहुत कम विकल्प बचते हैं। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है और गंभीर लक्षणों में काफी कमी आती है।
आधुनिक चिकित्सा तकनीक की क्षमता को दिखाती-
अस्पताल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं फैसिलिटी डायरेक्टर यश रावत ने कहा कि यह उपलब्धि फोर्टिस की विशेषज्ञ टीम और आधुनिक चिकित्सा तकनीक की क्षमता को दिखाती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य ऐसे मरीजों तक भी नई और उन्नत चिकित्सा तकनीक पहुंचाना है, जिनके लिए पारंपरिक इलाज संभव नहीं होता।
भरोसेमंद मेडिकल डेस्टिनेशन-
यह सफलता भारत को जटिल हृदय रोगों के इलाज के क्षेत्र में एक मजबूत और भरोसेमंद मेडिकल डेस्टिनेशन के रूप में भी नई पहचान दिलाती है।